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जिले में युवा ही नहीं नाबालिग भी बन रहे हैं नशेड़ी

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नागरिक अस्पताल में स्थित नशा मुक्ति केंद्र। - फोटो : Sirsa
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सिरसा। सरकार ने 21 वर्ष की आयु वाले युवाओं को शराब पीने की छूट दे रखी है। लेकिन सिरसा के हालात यह है कि यहां पर 15 वर्ष वाले नाबालिग भी नशे के आदी हो रहे हैं। युवा शराब के अलावा मेडिकल नशा, हेरोइन और अन्य कई तरह के नशे का सेवन कर उसकी लत में पड़ रहे है। स्थिति यह है कि शहर के नागरिक अस्पताल में स्थित नशा मुक्ति केंद्र में हर रोज 150 से अधिक लोग जांच करवाने पहुंच रहे हैं। जिनमें 100 मरीज नशे के शिकार मिलते हैं। इनमें से 15 से 20 वर्ष के करीब 30 पीड़ित जांच करवाने पहुंचते है।
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जिले में नशा लगातार पैर पसारता जा रहा है। बीते कुछ दिनों में तीन युवाओं की नशे के कारण मौत हो चुकी है। कोरोना काल से पहले नशे से पीड़ित मरीजों की आयु 20 से 25 वर्ष तक थी। लेकिन इसके बाद अब 15 वर्ष के नाबालिग भी नशे की चपेट में आ रहे है। नशे के पीड़ित मरीजों की बढ़ती संख्या और युवाओं का जीवन खराब होते देख उनके परिजनों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। नशा मुक्ति केंद्र में पहुंचने वाले मरीजों की विशेषज्ञ की ओर से जांच करने के बाद उन्हें इलाज दिया जाता है। ऐसे में कई मरीजों को दवाई शुरू की जाती है तो कई मरीजों को इलाज के लिए भर्ती भी किया जा रहा है। संवाद
पुलिस के अभियानों से जागरूक होकर हर रोज नशा छोड़ने के लिए पहुंच रहे पीड़ित
पुलिस प्रशासन की ओर से नशा छोड़ने के प्रति लोगों को जागरूक करने का अभियान चलाया गया है। जिसके चलते जिले के अलग गांवों में पुलिस अधिकारी पहुंचकर लोगों की बैठक लेते है और उन्हें नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करते है। ऐसे में नशा मुक्ति केंद्र में पुलिस प्रशासन की ओर से भी हर रोज 10 से 15 मरीजों को जांच के लिए भेजा जा रहा है। वहीं जागरूक होकर मरीज के परिजन व मरीज खुद ही नशा मुक्ति केंद्र में पहुंच रहे है।
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जिले में दो सरकारी और 12 के करीब खुले है निजी नशा मुक्ति केंद्र
नशे की चपेट में आ रहे मरीजों को दलदल से बाहर निकलने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से नागरिक अस्पताल और कालांवाली अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र खोला गया है। हालांकि डबवाली में डॉक्टर की ओर से जांच कर मरीजों का इलाज किया जाता है। वहीं सिरसा, कालांवाली, रानियां, जीवननगर, डबवाली में करीब 12 निजी नशा मुक्ति केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों में नशा पीड़ितों को दाखिल कर उनकी काउंसिलिंग की जाती है। वहीं जिला बाल कल्याण विभाग की ओर से भी दो केंद्र खोले गए है। जिनमें पीड़ितों की काउंसिलिंग की जाती है।
अस्पताल में दाखिल हैं 13 मरीज, चल रहा इलाज
नागरिक अस्पताल स्थित नशा मुक्ति केंद्र में अब 13 मरीजों का इलाज चल रहा है। जिसके चलते इन मरीजों को इलाज दिया जा रहा है। करीब एक सप्ताह मरीजों का कोर्स पूरा होने पर उन्हें वापस भेजा जा रहा है और जांच के लिए बुलाया जा रहा है। अधिक मरीजों की जांच कर उन्हें दवाईयां दी जा रही है। ताकि पीड़ित नशे की लत छोड़ कर सामान्य हो सके।
पंजाब और राजस्थान से सिरसा में पहुंच रहा है अधिक नशा
सिरसा जिला पंजाब और राजस्थान की सीमा के साथ सटा हुआ है। पंजाब क्षेत्र से हेरोईन, स्मैक जैसा नशा काफी मात्रा में पहुंचता है। जबकि राजस्थान क्षेत्र से अफीम, डोडा चूरा पोस्त अधिक मात्रा में सप्लाई हो रहा है। पुलिस की ओर से हेरोइन, अफीम, डोडा पोस्त सहित मेडिकल नशा पर पाबंदी लगाने के लिए अभियान चलाया हुआ है। लेकिन पंजाब और राजस्थान की सीमा सप्लायर नशे की भारी मात्रा लेकर सिरसा में पहुंचते है और जिले में एक जगह से दूसरी जगह पर सप्लाई किया जाता है।
कोरोना काल के बाद 15 से 20 वर्ष के युवा भी नशे की चपेट में आ रहे है। कोरोना से पहले 20 से 25 वर्ष के युवा नशा से पीड़ित पाए जाते थे। नशे से मरीजों की संख्या हर रोज बढ़ती जा रही है। मरीजों की जांच कर उन्हें दवाई व दाखिल कर उनका इलाज किया जा रहा है।
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-डॉ. पंकज शर्मा, मनोरोग विशेषज्ञ, नशा मुक्ति केंद्र, सिरसा।
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