no one remembers shaheed nihal singh death anniversary
- फोटो : Sirsa
शहीद निहाल सिंह गोदारा की शहादत का दिन सरकार, प्रशासन व नेताओं ने तो भुला दिया लेकिन शहीद की पत्नी रेशमा देवी कभी नहीं भूल सकतीं। सोमवार को गांव खेड़ी में शहीद निहाल सिंह गोदारा की 20वीं पुण्यतिथि पर स्मारक स्थल पर शहीद की पत्नी रेशमा देवी ने ही शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। लेकिन सरकार व प्रशासन व ग्राम पंचायत की तरफ से कोई अधिकारी व कर्मचारी नहीं पहुंचा। जिसको लेकर शहीद के परिजनों में रोष व्याप्त है। इनका कहना है कि आम तौर पर सरकार घोषणा करके भूल जाती है, लेकिन देश की रक्षा के लिए जान न्यौछावर करने वाले जांबाज जवानों की शहादत को भूलना तो शहीदों की शहादत का घोर अपमान है। सीमा सुरक्षा बल की 21वीं बटालियन का जवान निहाल सिंह गोदारा निवासी खेड़ी 11 नवंबर 1999 को कश्मीर में देश की सीमा की रक्षा करते हुए आतंकवादियों की गोली का शिकार हो गया था। लेकिन जाते जाते वह चार आतंकवादियों को धराशायी कर गया था। शहीद का शव दो दिन बाद गांव खेड़ी पहुंचा था जहां 13 नवंबर 1999 को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सोमवार को शहीद निहाल सिंह गोदारा के 20वें शहीदी दिवस पर शहीद की प्रतिमा पर शहीद की विधवा रेशमा देवी ने ही माल्यार्पण किया। प्रशासन का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने आई शहीद की पत्नी रेशमा देवी ने बताया कि उस समय सरकार ने कई घोषणाएं की थीं कि खेड़ी के राजकीय स्कूल का नामकरण शहीद के नाम पर किया जाएगा। खेड़ी से कागदाना जाने वाली सड़क का नाम भी शहीद के नाम पर रखा जाएगा। लेकिन एक भी घोषणा पर अमल नहीं हुआ। रेशमा देवी ने बताया कि उस वक्त सरकार घोषणा के अनुसार 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तो मिली थी। इस बार उसके पुत्र मुकेश को सरकारी नौकरी तो मिल गई। लेकिन गैस एजेंसी व पेट्रोल पंप नहीं दिया गया है, और न ही स्कूल व सड़क का नाम शहीद के नाम पर रखा गया। उन्होंने तो अपने खर्चे से ही गांव में स्मारक बनवाया व उसमें प्रतिमा स्थापित की है। हर बार सरकार व प्रशासन की तरफ से कोई नहीं आता नेता व अधिकारी तो भूल सकते हैं पर हम कैसे भूल सकते हैं। इनका कहना है कि सरकार की तरफ से किसी के न आने से आखिर परायेपन का अहसास करा ही देती है। ऐसा शहीदों का घोर अपमान कब तक होता रहेगा।