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अध्यात्मिक विचारधारा है निरंकारी मिशन : संत गर्ग

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सत्संग में प्रवचन सुनते हुए श्रद्धालु। 
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डबवाली। ब्रह्मज्ञान प्रचारक एवं निरंकारी मंडल के केंद्रीय योजना एवं सलाहकार बोर्ड दिल्ली के कन्वीनर संत एसएल गर्ग ने गांव चौटाला पहुंचकर निरंकारी अनुयायियों व अन्य श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। संत एसएल गर्ग ने कहा कि निरंकारी मिशन कोई धर्म या संप्रदाय नहीं, यह एक निरोल अध्यात्मिक विचारधारा है।
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इस मिशन से हिंदू, मुस्लिम, सिख ईसाई, बौध, जैन, पारसी, अलग-अलग भाषी, पहरावा व रंग नस्ल के देश विदेश में रहने वाले लोग जुड़ हुए हैं। जो पूर्ण सतगुरु के शरणागत होकर ब्रह्म ज्ञान को प्राप्त कर लेता है तो उसके सभी भ्रम खत्म हो जाते हैं। ब्रह्म उनके जीवन को सुंदर बना देता है। यदि सब लोग धर्म ग्रंथों में लिखी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतार लें तो वे सुखी हो जाएं और उनके जीवन में सुकून आ जाए।
संत एसएल गर्ग ने कहा कि हमें हर कार्य के लिए गुरु की जरुरत होती है लेकिन हम भक्ति बिना गुरु के ही कर रहे हैं। गुरु भी पूरा होना चाहिए अधूरा नहीं। जिसका गुरु नहीं, उसका जीवन शुरु नहीं। उन्होंने कहा कि निरंकारी मिशन पूरे भारत वर्ष में प्यार, नम्रता, सहनशीलता, करूणा, दया का पाठ पढ़ा रहा है। देश-विदेश में ब्रह्म की प्राप्ति, भ्रम की सामप्ति एवं एक को जानो, एक को मानो, एक हो जाओं का नारा दिया है।
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इस दौरान संत एसएल गर्ग ने पूर्व उपप्रधानमंत्री चौ. देवीलाल के पुश्तैनी निवास स्थान, जहां अब उनके पौत्र विधायक आदित्य देवीलाल परिवार सहित रहते हैं, वहां पर गए। आदित्य देवीलाल ने संत एसएल गर्ग व डाॅ. राजेंद्र यादव को शाल भेंट कर उनका सम्मान किया। इसके अलावा सेठ प्रेम जैन व सेठ बुद्ध राम के घर पर गए।
इसके अलावा संत एसएल गर्ग ने गांव में स्थित गोशाला में जाकर गोसेवा भी की एवं गोशाला प्रांगण में एक पौधा भी रोपित किया। शाम को निरंकारी भवन में आयोजित समागम में संत एसएल गर्ग को चौटाला के मुखी डा. राजेंद्र यादव व डबवाली संयोजक जसपाल मोंगा ने सफेद दुपट्टा पहना कर उनका सम्मान किया।
समागम के दौरान गुलजिंद्र गुल्लू एवं सहोता सिस्टर्स ने अपनी रचनाएं सुनाकर सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। अंत में सभी के लिए गुरु का अटूट भंडारा लगाया गया। इस समागम में गांव चौटाला के साथ-साथ डबवाली, संगरिया, खाराखेड़ा, भारूखेड़ा, साबुआना व अन्य स्थानों से श्रद्धालु शामिल हुए।
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