आखिर गांव सावंतखेड़ा पूर्णतया बालश्रम मुक्त कैसे हो गया? इसका जवाब ढूंढने के लिए विदेशी बुधवार को गांव में पहुंचे। गांव के सरकारी स्कूल में पूर्व सरपंच, आशा वर्कर, एएनएम के साथ द्विभाषीय की सहायता से बातचीत की। डेढ़ घंटा चले प्रश्नों के दौर में बात निकलकर सामने आई कि विदेशों में बाल मजदूरी एक समस्या बनकर उभरी है।
बदल गई गांव की फिजा
करीब डेढ़ साल पहले एनजीओ चाइल्ड सरवाइवल इंडिया की टीम डायरेक्टर दीपा बजाज के नेतृत्व में गांव सावंतखेड़ा में पहुंची थी। गांव को बालश्रम मुक्त करने के लिए कार्य शुरू किया था। गांव के सरकारी मिडिल स्कूल के स्टाफ के साथ पूर्व सरपंच रणजीत सिंह का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। एएनएम, आशा वर्कर्स को साथ लेकर एनजीओ सदस्यों ने बाल मजदूरों की पहचान करनी शुरू की थी।
40 मजदूर रेखांकित हुए। उनके माता-पिता को समझाने के बाद आज गांव सावंतखेड़ा पूर्णतया बाल मजदूर मुक्त है। बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करवाने के साथ एनजीओ ने कई समस्याओं का निपटान कर डाला है।
एनजीओ ने की थी सुझाव पेटिका रखने की पहल
हुआ यूं कि गांव में आगमन के साथ ही एनजीओ ने स्कूल में एक सुझाव पेटिका रखवा दी, जिसे खोलने का अधिकार विद्यालय इंचार्ज और पूर्व सरपंच को था।
सेमिनार के जरिये बच्चे अपने अधिकारों को समझने लगे। पेटिका में एक बच्चे ने चिट्ठी डाली कि उसके सहपाठी को उसके माता-पिता पढ़ने से हटा रहे हैं। जैसे ही इसका पता बाल संरक्षण समिति को चला तो तुरंत एक्शन लेकर बच्चों को विद्यालय में रोका गया।
दो बाल विवाह रुकवाने में बच्चों का रहा विशेष योगदान
यही नहीं गांव में दो बाल विवाहों को रुकवाने में बच्चों का विशेष योगदान रहा। बाल विवाह का राज भी एक चिट्ठी ने खोला था। बच्चे का नाम गुप्त रखा गया। संस्था सदस्यों ने माता-पिता को समझाकर दोनों विवाह रुकवा दिए। गांव सावंतखेड़ा में बच्चों ने अपने अधिकार और कर्त्तव्य जानने के बाद बाल मजदूरी जैसी बुराई को दूर कर दिखाया।
बोले, नीदरलैंड में लागू करेंगे सावंतखेड़ा का आइडिया
बुधवार को सुबह 11 बजे गांव सावंतखेड़ा में नीरदलैंड से ओरथ्र, इलेश, माइके, विलेश, सोरभ झा पहुंचे। करीब साढ़े तीन घंटे उन्होंने गांव में बिताए।
इस दौरान बाल संरक्षण समिति से बातचीत की। करीब एक घंटा बच्चों के बीच बिताया। विदेशियों को उनके सवालों के जवाब मिलने के बाद आखिरकार पूर्व सरपंच रणजीत सिंह ने भी पूछ लिया कि क्या नीदरलैंड में भी बाल मजदूरी होती है? जवाब मिला कि हां। वहां हम भी अभियान चला रहे हैं। यहां का आइडिया वहां फिट कर सकें, यही जानने के लिए गांव सावंतखेड़ा आए हैं। इस मौके पर स्कूली बच्चों ने बालश्रम, बाल विवाह तथा बेटी बचाओ विषय पर बने ग्रीटिंग कार्ड भी विदेशियों को दिए।
इस मौके पर नानकचंद, पीटीआई अनिल कुमार, बलतेज सिंह, आंगनबाड़ी वर्कर स्वर्णलता, एएनम शीला देवी, सर्वजीत कौर डीए, अवतार सिंह, राज देवी, केवल कृष्ण, हरप्रीत कुलेरिया, धर्मानंद, सेव द चिल्ड्रन हेड नीलेश, पंच यश्पाल सिंह व अन्य मौजूद थे। राजकीय स्कूल में कला अध्यापक यशपाल सिंह जैतो की बनाई कलाकृतियां देखकर विदेशियों ने विद्यालय को खूब सराहा। इस मौके पर उन्होंने स्कूल प्रांगण में पौधारोपण भी किया।