नगर परिषद कार्यालय में मंगलवार को पार्षदों की बैठक नप उपाध्यक्ष सुमन जोइया, कार्यकारी सचिव वेदपाल की संयुक्त अध्यक्षता में बुलाई गई, जिसमें पार्षदों ने सरकार और प्रशासन पर असहयोग के आरोप लगाए और बैठक हंगामे के बीच स्थगित हो गई। इसके बाद पार्षदों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
मंगलवार बाद दोपहर दो बजे पार्षदों की बैठक नप कार्यालय में बुलाई गई। बैठक में विचार-विमर्श के बाद शहर में कोई विकास कार्य न होने और कर्मचारियों का वेतन न देने के मुद्दे पर बातचीत के बाद जब मौजूदा कर्मचारियों से फंड के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि नप के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए फंड नहीं है।
जब रिकवरी के बारे में बात की गई तो स्टाफ पूरा न होने की बात कही गई, जिसके कारण नप के पास रिकवरी करने व पूरा फंड न होने के कारण कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया जा सका। इस पर पार्षदों ने सरकार, प्रशासन द्वारा कोई सहयोग न किए जाने को लेकर हंगामा शुरू हो गया और कार्यकारी सचिव बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए। इसके बाद पार्षद भड़क गए और उन्होंने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इस संबंध में नप उपाध्यक्षा सुमन जोइया, उपाध्यक्ष कृष्ण लाल बॉबी, पार्षद विनोद बांसल, रविंद्र बिंदु, रमेश बागड़ी, युद्धवीर रंगीला, रविंद्र बबलू, अंजू बाला, मधु बागड़ी, रूपिंद्र कौर सूर्या, नवनिर्वाचित वार्ड तीन के पार्षद पवन बांसल और अन्य ने बताया कि जब से नगर परिषद में कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बने हैं, तब से आज तक सरकार और प्रशासन द्वारा कोई भी सहयोग नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों कुछ लोगों ने सब्जी मंडी के बीचों-बीच बने डिवाइडर को तोड़ दिया था, जिससे नगर परिषद को करीब 10 लाख रुपयों से ऊपर का नुकसान हुआ था। इस बाबत पुलिस में शिकायत देने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई न होना मामले को संदेह के घेरे में लाता है।
उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर पांच फरवरी तक सरकार और प्रशासन ने कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया और विकास कार्यों को लेकर कोई सहयोग नहीं किया तो वह नप कार्यालय को ताला लगाने पर मजबूर होंगे। इसकी जिम्मेवारी सरकार, प्रशासन की होगी। इस मौके पर अन्य पार्षद भी मौजूद थे।