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शिक्षा : राजकीय स्कूलों में अब पांच की जगह छह साल की उम्र में बच्चों को मिलेगा पहली कक्षा में दाखिला

Wed, 01 Feb 2023 07:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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राजकीय स्कूल में खेलते बच्चे।
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सिरसा। जिले के राजकीय स्कूलों में अब पहली कक्षा में 5 साल के नहीं 6 साल के विद्यार्थियों का दाखिला होगा। शिक्षा निदेशालय ने पत्र जारी कर सभी स्कूलों को निर्देश दिए जारी किए हैं कि इस शिक्षा सत्र से साढ़े 5 साल के विद्यार्थियों का ही दाखिला पहली कक्षा में होगा। वहीं अगले साल से 6 साल के विद्यार्थी पहली कक्षा में दाखिला ले सकेंगे।
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शिक्षा निदेशालय के इस फैसले से शिक्षा संघ में विरोध है। शिक्षकों का कहना है कि इस बदलाव से निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इस फैसले सरकारी स्कूलों में दाखिला कम होंगे। प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ेगी। प्राइवेट स्कूलों में ढाई साल के ही विद्यार्थियों का दाखिला हो जाता है। हालांकि ये फैसला प्राइवेट स्कूलों के लिए भी है। वहीं मनोचिकित्सकों का कहना है कि इस फैसले से बच्चों का मानसिक स्तर सुधरेगा। अगर बच्चों की नींव मजबूत होगी तभी भविष्य में वो अच्छा कर पाएंगे। आजकल का माहौल ऐसा हो गया है कि बच्चों पर बोझ ज्यादा हो गया है। इसके कारण आजकल डिप्रेशन, मानसिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं।

फाउंडेशन कोर्स को जल्द किया जाएगा लागू
सरकार द्वारा सभी स्कूलों में फाउंडेशन कोर्स को लागू किया जाएगा। ये कोर्स कुल पांच साल का होगा। इसके तहत बच्चा तीन कक्षाएं फाउंडेशन में करेंगे। जिसके तहत तीन साल प्री प्राइमरी में और 2 साल प्राइमरी में विद्यार्थी लगाएंगे। ये तीन साल विद्यार्थी प्ले स्कूल या आंगनबाड़ी में ही लगाएंगे। इसके बाद विद्यार्थी स्कूली शिक्षा में आएगा। विद्यार्थी का तीसरा, चौथा व पांचवां साल प्री प्राइमरी में ही लगाने होंगे व छठा साल प्राइमरी में लगाएगा।
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सरकार द्वारा शिक्षा के सुधार के नाम किए जा रहे प्रयोग प्रतिदिन शिक्षा के स्तर को गर्त में लेकर जा रहे है। गैर शैक्षणिक कार्यों से पहले ही शिक्षण व्यवस्था चरमराई हुई है। अब नई शिक्षा नीति की आड़ में प्रथम कक्षा में प्रवेश के लिए 6 वर्ष की आयु निर्धारित कर दी हैं। इस फैसले से सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम हो जाएगी। संघ मांग करता है कि सरकार की मंशा सही है तो नर्सरी कक्षा को पूर्ण कक्षा का दर्जा प्रदान करके नए पद सृजित किए जाए। आयु सीमा पर पुन विचार किए जाए। - बंसीलाल झोरड़, जिला अध्यक्ष, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ, सिरसा।


बच्चों का विकास हर उम्र में अलग - अलग होता है। जो पढ़ाई का पैटर्न है, वह बच्चे की उम्र के अनुरूप होना चाहिए। बच्चा किस उम्र में क्या सीखता है इसके बारे में मनोवैज्ञानिकों ने सर्च कर लिया है। बच्चे को जब हम जिस उम्र से पहले पढ़ाई में भेज देते है, तो उसके संज्ञानात्मक स्तर की नहीं होती है। इसके कारण बच्चा पढ़ाई से प्यार करना छोड़ देता है और बोझ समझने लगता है। इसके कारण बच्चे में उदासी, डिप्रेशन की शिकायत आ जाती है। इसलिए सरकार ने जो फैसला लिया है वह बहुत अच्छा है। इससे बच्चा पहले तीन साल खेलकूद में लगाएगा। इसके बाद स्कूली शिक्षा में जाएगा।
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डॉ. रविंद्र पुरी
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