संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। नगर परिषद को एक साल के बाद भी स्वच्छ भारत मिशन की ग्रांट नहीं मिली है। इसका असर स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियां पर देखने को मिल रहा है। शौचालयों से लेकर अन्य निर्माण कार्य इससे प्रभावित हो रहे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत एसडब्ल्यूएम (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) के लिए नगर परिषद प्रशासन ने 25 लाख रुपये की मांग भेजी थी। एक साल बीत जाने के बाद भी अभी तक नगर परिषद को ग्रांट नहीं मिली है। मौजूदा समय में सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर नगर परिषद की टीमें स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है।
इसके तहत शहर के अंदर वॉल पेंटिंग का कार्य किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर की जा रही जागरूकता की गतिविधियों को लेकर 4 से 5 लाख रुपये का बजट उनके पास है। इसी माध्यम से सभी गतिविधियां करवाई जाएंगी।
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हर माह जाती है एसडब्लयूएम रिपोर्ट
नगर परिषद के क्षेत्र में स्वच्छता को लेकर अलग-अलग पैमानों पर क्या कार्य किया जाता है, इसी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाती है। इस रिपोर्ट में कचरा निस्तारण की स्थिति, डंपिंग प्वाइंट के हालात, डोर टू डोर कचरे की स्थिति, बड़े स्तर पर कचरा उत्पादन करने वालों संस्थाओं की स्थिति आदि की जानकारी होती है। यही रिपोर्ट मुख्यालय में सिरसा की मौजूदा स्थिति की आंकलन रिपोर्ट में कारगर साबित होती है।
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ग्रांट से क्या होते हैं कार्य
- शौचालयों की मरम्मत व अपग्रेडेशन
- यूरिनल का निर्माण
- कम्युनिटी शौचालयों का निर्माण
- बाजारों की सार्वजनिक जगहों पर डस्टबिन लगाने का कार्य।
- स्वच्छता से जुड़ी मशीनरी आदि खरीदने का कार्य।
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत 25 लाख रुपये की ग्रांट की मांग की थी। यह ग्रांट इस बार नहीं मिल पाई है। हालांकि जागरूकता गतिविधियां निरंतर करवाई जा रही है। उसका फंड विभाग के पास है। वॉल पेटिंग का कार्य जारी है। - जयवीर सिंह, सीएसआई नगर परिषद सिरसा
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