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रात में खुईयां मलकाना तो सुबह भावदीन टोल कराया फ्री

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भावदीन टोल प्लाजा पर लगा किसानी व काला झंडा। - फोटो : Sirsa
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कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन के तहत 25 दिसंबर से लेकर 27 दिसंबर तक जिले में स्थित दोनों टोल प्लाजा को किसान जत्थेबंदियों द्वारा वाहनों के लिए टोल फ्री कर दिया गया है। किसानों ने टोल लाइनों पर किसानी व काले झंडे लगाकर टोल फ्री किया है। किसानों ने टोल पर धरने की शुरूआत करने से पहले किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों को दो मिनट की मौन श्रद्धांजलि भी दी। हालांकि इस दौरान पुलिस कर्मचारी भी तैनात रहे, लेकिन किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई।
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जानकारी के अनुसार किसानों ने वीरवार रात को डबवाली के खुईयां मलकाना टोल प्लाजा को वाहनों के लिए फ्री कर दिया गया था। साथ ही भावदीन टोल प्लाजा को शुक्रवार सुबह करीब साढ़े सात बजे किसान जत्थेबंदियों द्वारा टोल लाइनों पर किसानी झंडे लगाकर टोल मुक्त किया गया है। टोल मुक्त करने को लेकर जिला प्रशासन द्वारा वीरवार को बैठक कर जिले के दोनों टोल प्लाजा के लिए सुरक्षा देने के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। टोल फ्री करने को लेकर टोल प्लाजा पर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए दोनों टोल प्लाजा पर भारी संख्या में पुलिस कर्मी तैनात रहे। भावदीन टोल प्लाजा पर 25 से 27 दिसंबर तक किसानों द्वारा पक्का धरना दिया जा रहा है इन तीनों दिन टोल प्लाजा को आम लोगों के लिए फ्री रखा जाएगा।
इस मौके पर सत्कार सभा नेता बाबा सुखविंदर सिंह, राकेश कंबोज रतियां, हरविंदर सिंह,बिंदर सिंह वेदवाला, लखविंदर सिंह करीवाला, लक्खा सिंह अलीकां किसान नेताओं ने अपने विचार रखे। किसान नेताओं ने मंच संचालन की शुरूआत करते हुए ही यह घोषण भी कि हमारी लड़ाई मौजूदा सरकार द्वारा जारी तीन कृषि कानूनों को लेकर है, आज हम यहां एक किसान के रूप में इकट्ठा हुए हैं। कोई भी व्यक्ति किसी भी पार्टी से संबंधित हो वह मंच पर उसका नाम या उसके द्वारा किए गए कामों को नई बताएगा। हम किसान है और किसानों के हित की ही बात करेंगे। मंच पर बोलते समय सब लोग भाषा की मर्यादा को न भूले और कोई भी वक्ता प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के प्रति गलत भाषा प्रयोग नहीं करेगा।
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बता दें कि किसान आंदोलन 25 दिसंबर को करीब एक महीना पूरा होने को है। इस दौरान शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए भावदीन टोल प्लाजा पर किसान जत्थेबंदी द्वारा अखंड पाठ करवाया जा रहा है। इसी के साथ टोल प्लाजा पर आस पास के गांवों से लंगर की सेवा भी की जा रही है।
सरकार को अन्नदाता की नहीं, औद्योगिक घरानों की अधिक चिंता : भारूखेड़ा
किसान नेता प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि किसानों की एक ही मांग है कि इन तीन कृषि कानूनों को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए और एमएसपी कानून बनाकर किसानों की फसलों का रेट निर्धारित कर उन्हें राहत दी जाए, लेकिन सरकार पूंजीपतियों की गुलाम हो चुकी है। सरकार को देश के अन्नदाता की नहीं, बल्कि औद्योगिक घरानों की अधिक चिंता है। एक-एक कर सरकार ने कई विभाग ठेके पर पूंजीपतियों को सौंप दिए, जिससे आमजन को आगामी समय में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इस मौके पर हरियाणा किसान सभा के कंवीनर डॉ. सुखदेव सिंह जम्मू व हैैप्पी सिंह रानियां ने कहा कि करोड़ों भारतीयों का पेट भरने वाले अन्नदाता को भी सरकार ने अपने चहेतों को लाभ देने के लिए बलि का बकरा बना दिया। इन तीनों कानूनों से किसान वर्ग तबाह हो जाएगा। आगामी समय में निजी कंपनी के सभी उत्पादों का बहिष्कार किया जाएगा।

आंदोलन में शहीद किसानों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देते हुए।- फोटो : Sirsa

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