संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। नागरिक अस्पताल में शनिवार को एक आपातकालीन स्थिति के उपचार की मॉक ड्रिल (अभ्यास) करवाई गई। ड्रिल के तहत तीन घायल मरीजों को लेकर एक एंबुलेंस सुबह करीब 11 बजे अस्पताल पहुंची। नर्सिंग की छात्राओं ने घायलों की भूमिका निभाई, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया। गंभीर रूप से घायल प्रथम श्रेणी के मरीज को इमरजेंसी कक्ष, द्वितीय श्रेणी को गैलरी, जबकि तीसरे श्रेणी के घायल को अन्य उपचार कक्ष में शिफ्ट किया गया।
आपदा प्रबंधन समिति के सदस्य डॉ. वीरेश भूषण ने इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों व स्टाफ की कार्यप्रणाली की बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने पाया कि गंभीर रूप से घायल मरीज के लिए मांगी गई बड़ी स्प्लिट मौके पर उपलब्ध नहीं थी। इस पर स्टाफ ने दो छोटी स्प्लिट जोड़कर काम चलाया। डॉ. भूषण ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आपातकालीन उपकरणों की उपलब्धता में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
डॉ. भूषण ने एक अन्य चूक की ओर भी ध्यान दिलाया। घायल मरीज का इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर ने उसके जूते नहीं उतारे थे। उन्होंने कहा कि ऐसे में तुरंत जूते उतारकर प्राथमिक चिकित्सा शुरू की जानी चाहिए। साथ ही यह भी निर्देश दिए कि मरीज के पहुंचते ही उससे संवाद किया जाए, यदि वह अचेत हो तो तुरंत सीपीआर शुरू किया जाए।
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तीन स्तरों पर किया गया उपचार अभ्यास
प्रथम श्रेणी के घायल के बाद, द्वितीय और तृतीय श्रेणी के मरीजों का भी अलग-अलग स्थानों पर उपचार अभ्यास किया गया। अस्पताल स्टाफ, डॉक्टर, नर्सिंग स्टूडेंट्स व अन्य कर्मचारियों ने पूरी गंभीरता से इस मॉक ड्रिल में भाग लिया। डॉ. एमके भादू ने कहा कि इस प्रकार के अभ्यास समय-समय पर होते रहने चाहिए ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में अस्पताल पूरी तरह तैयार रहे।