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घर जाने की जद्दोजहद में लगे प्रवासी

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ऑटों में सवार प्रवासियों से पूछताछ करते पुलिसकर्मी। - फोटो : Sirsa
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लॉकडाउन के दौरान के प्रवासी मजदूर अपने घर जाने की जद्दोजहद में लगे हुए है। 17 मई तक लॉकडाउन का 55 दिन का समय इनके लिए बिना काम के गुजारना मुश्किल रहा। लॉकडाउन में प्रशासन द्वारा मिली छूट के चलते प्रवासी अपने-अपने घरों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। सिरसा से साइकिल पर निकल रही प्रवासियों की एक टोली से जब बात की तो उन्होंने बताया कि वह बठिंडा में कार डेंटिंग का काम करते हैं। लॉकडाउन के कारण उन्हें अब काम नहीं मिल रहा और न ही पैैसे। घर जाने की आस में उन्होंने कई दिन तक एक समय का ही खाना खाया। जो पैसे बचा कर रखे थे, उससे साइकिल खरीद और यूपी के लिए रवाना हो गए। हाईवे पर तेज धूप से सिर चकरा जाता है। दोपहर के समय थोड़ी-थोड़ी दूर पर रुककर आराम करना पड़ता है।
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प्रवासी हरी राम ने बताया कि जब घर के लिए निकलने लगे तो केवल एक बैग में ही सारा सामान बांध लिया। साइकिल पर बैठा तो सोचा था कि सामान के साथ ही घर पहुंचेंगे। लेकिन लगता है खाली पेट होने से शरीर भी साथ छोड़ रहा है। अब तो लगता है कि किसी तरह घर पहुंच जाएं तो ठीक होगा।
प्रशासन कटवा रहा चक्कर, भटक रहे पैदल
मध्य प्रदेश से आए प्रवासी सिरसा में ईंट भट्ठे पर काम कर रहे हैं, जिन्होंने कुछ दिनों पहले पास के लिए अपना मेडिकल करवाया था और उसके लिए आवेदन भी किया था। इसमें शनिवार देर रात करीब आठ बजे उन्हें प्रशासन की ओर से फोन किया गया कि वह रविवार शाम छह बजे से पहले सिकंदरपुर डेरे में आ जाएं, ताकि उन्हें बसों के माध्यम से घर भेजा जा सके। मंजूर अंसारी ने बताया कि जब वह सात लोग सिकंदरपुर डेरे में पहुंचे तो वहां मौजूद अधिकारियों ने उन्हें वापस जाने को कहा और बताया कि सभी लोग सिरसा के भगत सिंह स्टेडियम में ही रुकें, वहीं से उन्हें भेजा जाएगा। लेकिन जब सभी लोग पैदल चलकर वापस पहुंचे तो यहां भी उनका कोई समाधान नहीं किया गया।

migraint in the struggle of going home- फोटो : Sirsa

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