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नया भवन बन कर तैयार पर अभी उद्घाटन का इंतजार

Sun, 12 Feb 2017 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सिरसा
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Mahila college - फोटो : Bureau
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एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे का खूब ढिंढोरा पीट रही है तो दूसरी तरफ कंडम भवन में पढ़ रही छात्राओं के जीवन से भी खिलवाड़ पर सरकार गंभीर नहीं दिख रही। पढ़ाई के लिए न तो शिक्षक नियुक्त हुए हैं न ही कॉलेज के कामकाज के लिए गैर शिक्षण कर्मी। ऐसे में न तो बेटी बचाओ की ओर सरकार को चिंता है और न ही बेटी पढ़ाओ की ओर।
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सिरसा के राजकीय महिला कॉलेज का भवन बनकर तैयार है पर उद्घाटन न हो पाने के चलते यहां पर कॉलेज शिफ्ट करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। गनीमत रही कि 10 सालों में भवन में छात्राएं सुरक्षित रहीं पर कंडम भवन में हजारों छात्राओं की कक्षाएं लगाकर शासन-प्रशासन शायद हादसे का इंतजार कर रहा है।
वर्षों पुरानी मांग को पूरा करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा ने सिरसा में राजकीय महिला कॉलेज की घोषणा और करीब 18 करोड़ की राशि भी मंजूर की। सत्ता परिवर्तन के बाद कॉलेज के निर्माण पर ग्रहण लग गया। कुछ समय बाद मौजूदा सरकार ने फिर से कॉलेज निर्माण की घोषणा की और निर्माण आरंभ करवा दिया। कॉलेज निर्माण पर करीब 18 करोड़ की राशि खर्च हुई। कॉलेज के भवन का निर्माण दिसंबर माह में ही पूरा हो गया था। मात्र बिजली और पानी का कनेक्शन बाकी है। ऐसे में नए भवन में दिसंबर माह में ही शिफ्ट किया जा सकता था। बता दें कि जिस भवन में छात्राएं पिछले दस सालों से पढ़ रही हैं वह भवन अंग्रेजों के जमाने में बनाया गया था जिसे करीब 15 साल पूर्व ही कंडम घोषित कर दिया गया था। इतने जोखिम में छात्राएं पढ़ रही हैं पर शासन-प्रशासन को छात्राओं के जीवन से कोई सरोकार नजर नहीं आ रहा। इसी प्रकार सरकार ने दो वर्ष पूर्व महिला कॉलेज की स्थापना की घोषणा तो कर दी पर इसमें अब तक एक भी शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मी की नियुक्ति नहीं हो पाई है। गत माह में 15 शिक्षकों और आठ गैर शिक्षण कर्मियों के पदों को स्वीकृति मिली है जो जरूरत से काफी कम हैं। ऐसे में छात्राओं की शिक्षा के प्रति सरकार कितनी गंभीर है यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। एक अनुमान के अनुसार कॉलेज में कम से कम 50 शिक्षक और 20 गैर शिक्षण कर्मियों की जरूरत है। स्वीकृत हुए पदों पर भी नियुक्ति के अभी कोई आसार नजर नहीं आ रहे। कॉलेज भवन तैयार होने के बावजूद अब तक शिफ्ट नहीं हो पाना भी शासन-प्रशासन की ढिलाई को दर्शा रहा है। अब तक दूसरे कॉलेजों से डेपुटेशन पर आए स्टाफ से ही छात्राओं की पढ़ाई हो रही है। शिक्षकों की कमी के कारण छात्राओं की एक विषय की कक्षाएं सप्ताह में एक या दो बार ही लग पाती हैं। अब देखना यह है कि सरकार कब नए भवन का उद्घाटन कर छात्राओं को जोखिम भरे माहौल से निकालती है।
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बरसात के दिनों में टपकता है पानी
जर्जर भवन में बरसात के दिनों में छत से पानी टपकने लगता है। ऐसे में छात्राएं पढाई नहीं कर सकती। भवन इतना जर्जर हो चुका है कि कभी गिर सकता है। इस डर से यहां से 15 साल पूर्व तहसील कार्यालय शिफ्ट कर दिया गया था। वर्ष 2007 में वहां पर राजकीय नेशनल कॉलेज की महिला विंग की कक्षाएं शुरू कर दी गई। अब दो सालों से महिला विंग को महिला कॉलेज का दर्जा दिया जा चुका है। दस सालों में छात्राओं की पढाई और जीवन दोनों ही राम भरोसे रहे हैं।

राजकीय महिला कॉलेज की प्राचार्या डॉ. स्नेह नंदा ने कहा कि कॉलेज कब शिफ्ट होगा इसकी अभी कोई सूचना नहीं है। बिजली और पानी का कनेक्शन होना है अभी। उन्होंने बताया कि शिक्षकों के 15 पद और गैर शिक्षण कर्मियों के आठ पदों को स्वीकृति मिली है पर अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है।
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इस प्रकार है छात्राओं की संख्या
विषय                संख्या
अंग्रेजी                1433
हिंदी                  1249
गणित                 341
इतिहास               452
वाणिज्य               404
भूगोल                 449
अर्थ शास्त्र             580
लोक प्रशासन          152
राजनीति शास्त्र         465
पर्यावरण विज्ञान        698
मनोविज्ञान             229
शारीरिक शिक्षा         1651
पंजाबी                 200
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