डबवाली। डबवाली शहर का मीना बाजार। संवाद
डबवाली। डबवाली शहर की लाइफलाइन माने जाने वाला मीना बाजार अब खरीदारी का केंद्र नहीं रहा। शहरवासियों और प्रशासन की लापरवाही के कारण यहां ग्राहकों का अपने वाहन लेकर आना मुश्किल हो गया है। पिछले दिनों फोटो फ्रेम के एक गोदाम में आग लगने के बाद दमकल की गाड़ी तक बाजार में नहीं जा सकी थी। लोगों ने अतिक्रमण हटाने की मांग की। इसके बावजूद एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी नगर परिषद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
बाजार में अवैध कब्जे और गोदाम, प्रशासन की मौन स्वीकृति
मीना बाजार की गलियां पहले आवासीय क्षेत्र हुआ करता था और यह शहर के प्रतिष्ठित परिवार रहा करते थे। धीरे-धीरे परिवार यहां से शिफ्ट होते गए और लोगों ने इस क्षेत्र को व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बदल दिया। आज इनमें स्थायी और अस्थायी कब्जों की भरमार है जिन पर नगर परिषद की कार्रवाई सिर्फ दिखावे की होती है वो भी महज इतनी कि किसी का फ्लेक्स बोर्ड उठा लिया। कभी किसी का बैंच उठा कर कार्रवाई की खानापूर्ति कर दी जाती है। सवाल यह है कि जब पूरे बाजार में अवैध गोदाम और निर्माण खुलेआम हो रहे हैं, तब नगर परिषद की आंखों पर पट्टी क्यों बंधी है।
बिल्डिंग एक्ट की धज्जियां और सरकारी नुकसान
नगर परिषद के अधिकारी बिल्डिंग एक्ट का पालन नहीं कर रहे हैं। कथित तौर पर आवासीय निर्माण की फीस लेकर कॉमर्शियल निर्माण की अनुमति दी जा रही है। इससे न केवल कानून की अनदेखी होती है, बल्कि सरकारी खजाने को भी नुकसान पहुंचता है।
बाजार बन चुका डेंजर जोन
नगर परिषद और जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण बाजार फायर डेंजर जोन में बदल चुका है। यह सिर्फ मीना बाजार की कहानी नहीं, बल्कि पूरे शहर के बाजारों के हालात हैं। डबवाली पहले ही 1995 की आगजनी त्रासदी झेल चुका है, जिसमें सैंकड़ों लोगों की जान और संपत्ति प्रभावित हुई थी।
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कि जल्द ही नगर परिषद की ओर से शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाएगा, ताकि शहर अतिक्रमण मुक्त हो और आमजन को राहत मिल सके। इस दिशा में काम शुरू हो गया है।
- टेकचंद छाबड़ा, चेयरमैन, नगर परिषद।