सिरसा। शारदीय नवरात्र का पर्व आस्था और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। रविवार को छठे दिन श्रद्धालुओं ने मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। महिलाएं व्रत रखकर घरों में भी मां की पूजा करती नजर आईं। इस बार अष्टमी से पहले बाजारों में जो रौनक देखने को मिल रही है, उसने पूरे शहर का माहौल बदल दिया है।
रविवार को नवदुर्गा का छठा स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा हुई। मान्यता है कि उनकी आराधना से विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं और दांपत्य जीवन सुखमय बनता है। सोमवार को मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पुष्प, फल, धूप और दीप अर्पित कर आशीर्वाद लिया।
अष्टमी की तैयारियों में सजे बाजार
मंगलवार को नवरात्र का अष्टम दिन होगा। इस दिन मां महागौरी की पूजा और घरों में कंजक पूजन होगा। इसे लेकर बाजारों में खरीदारों की जबरदस्त भीड़ उमड़ी हुई है। मुख्य बाजारों में महिलाओं और बच्चों की चहल-पहल दिख रही है। दुकानों पर कंजकों के लिए स्टील और प्लास्टिक के बर्तन की खरीदारी जोरों पर रही। महिलाएं स्टील के गिलास और कटोरियां खरीदती नजर आईं। किरयाने की दुकानों पर हलवे, पूड़ी और चने की सामग्री खरीदने वालों की लंबी कतारें लगी रहीं। दुकानदारों ने बताया कि अष्टमी और नवमी पर हर साल बिक्री का बड़ा अवसर मिलता है और इस बार भी लोग बढ़-चढ़कर खरीदारी कर रहे हैं।
चुनरी और गिफ्ट आइटम्स की बढ़ी मांग
महिलाएं मां की लाल चुनरी, चुनरी सेट और पूजन सामग्री की खूब खरीदारी कर रही हैं। कन्याओं को भेंट देने के लिए खिलौने, कपड़े और स्टेशनरी आइटम्स की भी अच्छी मांग है। महिलाएं चूड़ियां, बिंदियां, रिबन और गिफ्ट आइटम्स खरीदने में व्यस्त दिखीं। खरीदारी करने आईं शर्मिला ने बताया कि हर साल अष्टमी पर कन्या पूजन होता है, जिसमें छोटी बच्चियों को देवी का रूप मानकर भोजन और उपहार दिए जाते हैं। इस बार उन्होंने कन्याओं और मेहमानों के लिए नए बर्तन और चुन्नरी खरीदी है।
किरयाने की दुकानों पर चहल-पहल
अष्टमी पर हलवा-पूरी, चने और खीर का विशेष महत्व है। बाजार में सूजी, बेसन, आटा और घी की खरीदारी खूब हो रही है। हलवे के लिए मेवे और ड्राई फ्रूट्स की दुकानों पर भीड़ लगी रही। मिठाई विक्रेताओं का कहना है कि नवरात्रि में बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में तीन गुना तक बढ़ जाती है।
आज होगी मां कालरात्रि की पूजा
सोमवार को श्रद्धालु सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना करेंगे। धार्मिक मान्यता है कि उनकी आराधना से भय और संकटों से मुक्ति मिलती है।