संवाद न्यूज एजेंसी
रोड़ी। कस्बे के एक सरकारी स्कूल के मुख्य अध्यापक पर छात्राओं ने छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे। इस मामले की जांच ने सरकारी योजनाओं की पोल खोलकर रखी दी है। छात्राओं को स्कूलों में सुरक्षित माहौल देने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा मन की बात कार्यक्रम करवा जाता है, लेकिन शिक्षक इसको गंभीरता से नहीं ले रहे। कार्यक्रम के तहत महिला शिक्षक छात्राओं से गुड टच-बैड टच पर चर्चा करती हैं। इस पूरे मामले में महिला शिक्षकों का छात्राओं के साथ कोई समन्वय नहीं दिखा। खंड शिक्षा अधिकारी ने इस पर नाराजगी भी जताई है। उनका कहना है मन की बात कार्यक्रम से महिला शिक्षकों ने कुछ नहीं सीखा है। अब इसकी रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
जानकारी के अनुसार सरकारी स्कूलों में हर माह शिक्षा विभाग की ओर से मन की बात कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इसका कार्यक्रम बच्चों को स्पर्श सहित अन्य मुद्दों पर जागरूक किया जाता है और उनके मन की बात का जाना जाता है। किस प्रकार का स्पर्श सही है और गलत है। गलत तरीके से किए गए स्पर्श के पीछे व्यक्ति की क्या मंशा है। इन सब बातों को बच्चों को समझाने की जिम्मेदारी कार्यरत महिला शिक्षकों को दी जाती है, ताकि छात्राएं उन्हें उनके साथ हुई अप्रिय घटनाएं साझा कर सके।
गंभीरता से लेना बेहद जरूरी
आज के समय में बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में बताना बेहद जरूरी हो गया है। मुख्य अध्यापक द्वारा छात्राओं से छेड़छाड़ मामले में खुलासा हुआ कि महिला शिक्षकों का सभी छात्राओं के साथ समन्वय नहीं था। सभी मुख्य अध्यापक के डर में थीं। इसलिए ही शुक्रवार को उन्हें जानकारी मिलने के बाद भी महिला शिक्षकों ने खंड शिक्षा अधिकारी को जानकारी नहीं दी। इस मामले में खड़ शिक्षा अधिकारी की ओर से रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
गुड टच और बैड टच कार्यक्रम को गंभीरता से नहीं लिया गया है। इसकी अहमियत समझी होती तो छात्राएं उनके साथ होने वाली आप बीती पहले ही बता देतीं। महिला शिक्षकों को इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। इसकी रिपोर्ट भी उच्चाधिकारियों को दी जाएगी। - मनीषा निधिपा, खंड शिक्षा अधिकारी।