हैलो! मेरी मां की मन्नत पूरी हुई है। हम बाबा रामदेव मंदिर को चार लाख रुपये दान देना चाहते हैं। इस समय मैं, जयपुर हूं। 19 को दिल्ली पहुंच जाऊंगा। आप दिल्ली के किसी परिचित का पता बता दें, रकम उस तक पहुंच जाएगी। ऐसी कॉल 17 फरवरी को मंदिर प्रबंधक कमेटी के प्रधान धन्ना राम के पास आई। प्रधान एकदम से चौंक गया। उसने अपने साथी कृष्ण खटनावलिया को पूरा मामला सौंप दिया। कॉलर ने खुद को एनआरआई बताते हुए अपनी पहचान मि. अरोड़ा के रूप में करवाई। कॉलर को दिल्ली के दो लोगों के कांटेक्ट नंबर दिए गए। लेकिन वह बहाने बनाता रहा। 18 फरवरी को भी कॉल की। 19 फरवरी को अचानक गिरगिट की तरह रंग बदल गया। कॉलर ने कहा कि बठिंडा के पास गांव रामपुरा है। वहां उन्होंने संत का आश्रम बनाया था। वह संत बहुत बीमार हैं। मुझे शर्म आ रही है कि मैं, आपसे 40 हजार रुपये की सहायता मांग रहा हूं। मैं आपको चार लाख 40 हजार रुपये लौटा दूंगा। यदि आप 40 हजार रुपये देने के इच्छुक हैं, तो मुझे बताएं, मैं अपना परिचित भेज देता हूं। अभी कॉलर ने फोन काटा ही था कि एक अन्य नंबर से कॉल आई। कॉलर ने बताया कि अरोड़ा साहब ने आपका नंबर दिया है। उन्होंने कई बार मेरी गाड़ी का प्रयोग किया है। आप पैसे देना चाहते हैं तो अभी मैं, बठिंडा से निकल सकता हूं। दो लोग कार पर सवार होकर न्यू बस स्टेंड रोड़ पर स्थित बाबा रामदेव मंदिर के पास पहुंच गए। कृष्ण खटनावलिया तथा प्रेम कुमार कनवाड़िया ने दोनों को पकड़ लिया। मौका पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना पाकर पुलिस भी मौका पर पहुंच गई। पुलिस ने 40 हजार रुपये लेने आए दो लोगों को गाड़ी समेत पकड़ लिया।
चढ़ावे पर थी नजरदरअसल, 17 फरवरी को बाबा रामदेव का मेला भरा था। उपरोक्त लोगों को इसकी पूरी खबर थी। सीधा प्रधान से संपर्क किया। चढ़ावे पर नजर गढ़ाते हुए हजारों रुपये की राशि ऐंठनी चाहिए। लेकिन प्रयास असफल रहा। यह पहला मामला नहीं, जब ऐसा हुआ। इससे पहले आस्था के नाम पर ठगों ने गौशाला प्रबंधकों से भी ठगी करने का प्रयास किया था।
दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। उनका पूरा बायोडाटा पुलिस ने ले लिया है। जानकारी जुटाने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया है।-सुखदेव सिंह, प्रभारी, शहर थाना, डबवाली