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मन की शांति के लिए कीर्तन और तप जरूरी : डाॅ. दिव्यानंद महाराज

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प्रवचन के दौरान मौजूद श्रद्धालु। 
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सिरसा। सनातन धर्म राधा कृष्ण मंदिर वाली गली में दिव्य आध्यात्मिक हनुमत सत्संग समारोह का आयोजन किया गया। सत्संग के दूसरे दिन कथावाचक डाॅ. स्वामी दिव्यानंद महाराज ने बताया कि जीवन एक सिलेबस की भांति है, जिस प्रकार सिलेबस पूरा होने के बिना सफलता नहीं मिलती, ठीक उसी प्रकार जब तक कीर्तन नहीं करोगे, तप नहीं करोगे तो जीवन में शांति नहीं मिलेगी।
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डॉ. स्वामी ने कहा कि जीवन में शांति के लिए कीर्तन करना परमावश्यक है। उन्होंने कहा कि नाक सूंघता है कि कहीं से कुछ जलने की बदबू आ रही है, कान सुनता है कि कहीं से टक-टक की आवाज आ रही है। क्या कभी सत्संग में बैठकर सत्संग को सुना है। जिन लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण की बातों को सुनकर अमल किया, वे तर गए और जिन्होंने उनकी बातों को अनसुना किया, वे अपना सर्वस्व मिटा बैठे।
स्वामी ने कहा कि ग्रंथ हमें बहुत कुछ सिखाते हैं। जिस व्यक्ति ने ग्रंथ को अपने जीवन में उतार लिया, वह परमात्मा की शरण में चले गए और जीवन में कभी कोई दुख उन्हें दुखी नहीं कर सकता। स्वामी ने उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि अगर मन की शांति चाहिए तो तन-मन से भगवान की भक्ति में लीन हो जाएं।
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इस अवसर पर सुरेश सिंगला, यशपाल बांसल, राजीव बंसल, जयप्रकाश भोलुसरिया, हीरालाल शर्मा, भूषण गर्ग, पवन ठेकेदार, गुलशन वधवा, नरेंद्र, उमंग, जोगेंद्र नागपाल, धर्मपाल मेहता, सतीश गोयल, संजय गोयल आदि मौजूद रहे।
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