फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ज्वाइंट कमिश्नर ने छुट्टी के दिन ऑफिस का ताला तोड़ा

Sat, 15 Apr 2017 01:01 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो/सिरसा
विज्ञापन
विज्ञापन
3500 करोड़ के घोटाले में ईडी द्वारा आरोपी बनाए गए सिरसा के गांव बणी स्थित नामधारी राइस मिल के मालिक इंद्रसिंह से जुड़ी सील फाइलों को आबकारी एवं कराधान विभाग के संयुक्त आयुक्त शिव कुमार ने अपने कब्जे में ले लिया। शुक्रवार को अवकाश के दिन सुबह करीब साढ़े दस बजे हिसार के संयुक्त आयुक्त शिव कुमार सिरसा पहुंचे। वे सिरसा उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ के साथ सीधा लघु सचिवालय स्थित आबकारी एवं कराधान विभाग के दफ्तर गए और ऑफिस का ताला तुड़वाकर स्थानीय आबकारी एवं कराधान अधिकारी वीके शास्त्री के रूम से  घोटाले से जुड़ी फाइलों को अपने कब्जे में लेकर सील किया। प्रदेशभर में दस हजार 615 करोड़ के इस घोटले को उजागर करने वाले एवं शिकायतकर्ता शिव साहनी निवासी अजमेर ने संयुक्त आयुक्त की इस कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाए हैं। शिव साहनी का कहना है कि स्थानीय अधिकारी वीके शास्त्री से ज्वाइंट कमिश्नर ने अनुमति लिए बिना दफ्तर का ताला तोड़ा है। नियम के अनुसार जांच अधिकारी के समक्ष सारी फाइलें कब्जे में लेकर सील करनी चाहिए थी।
विज्ञापन


लेकिन ज्वाइंट कमिश्नर ने अधिकारी को तलब कर ताला खुलवाने की जहमत तक नहीं उठाई। शिव साहनी का कहना है वर्ष 2009 में उन्होंने ये घोटाला उजागर किया था। लोकायुक्त ने जांच के एसआईटी गठित की थी जिसमें जांच अधिकारी आईजी श्रीकांत जाधव को नियुक्त किया गया। नामधारी राइस मिल अन्य मिल मालिक ने जांच में सहयोग नहीं किया तो जांच अधिकारी ने लोकायुक्त को रिपोर्ट दी कि आरोपियों द्वारा एसआईटी का तनिक भी सहयोग नहीं किया जा रहा ऐसे में मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाए। ईडी के संज्ञान में घोटाला सामने आया तो उसने नामधारी राइस मिल के मालिक इंद्रसिंह के खिलाफ 3500 करोड़ के घोटाले में केस दर्ज करके वर्ष 2013 में गिरफ्तार कर लिया। ईडी ने घोटाले की जांच के संबंध मुख्य सचिव से जवाब तलब किया था। इसके बाद आबकारी एवं कराधान विभाग की टीम ने नामधारी राइस मिल में छापेमारी करके वहां मिले सारे दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। दस्तावेज की जांच का जिम्मा अर्थ शास्त्री एवं सिरसा के आबकारी एवं कराधान अधिकारी वीके शास्त्री को सौंपा। तमाम अहम दस्तावेज वीके शास्त्री के पास उनके ऑफिस में थे।

 शिकायतकर्ता शिव साहनी का आरोप है कि ज्वाइंट कमिश्नर शिव कुमार की मंशा इस मामले में संदिग्ध लग रही है। इस संबंध में ज्वाइंट कमिश्नर शिव कुमार से बातचीत करने के लिए सैकड़ों बार उनके मोबाइल पर कॉल की लेकिन उन्होंने हर बार कॉल रिसीव करने की बजाए फोन काटते रहे। इसके बाद सिरसा उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने बताया कि आबकारी एवं कराधान विभाग के हिसार संयुक्त आयुक्त के पास कोई शिकायत आई थी। इसी आधार पर विभाग के सिरसा ऑफिस में जाकर कुछ रिकॉर्ड उन्होंने सील किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें