जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जाट समुदाय के निर्दोष लोगों पर बनाए गए झूठे मुकदमों को वापस लेने की मांग को लेकर रविवार को लघु सचिवालय के पार्क में जाटों ने धरना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी, तब तक धरना जारी रहेगा। सोमवार से धरना हुडा सेक्टर 19 के मैदान में शुरू होगा, जिसके लिए प्रशासन ने स्थान उपलब्ध कराया है।
धरने के दौरान प्रशासन, पुलिस मुस्तैद रहे। धरने का नेतृत्व सर्व जाट संघ के प्रधान विकल पचार और रणधीर सिंह जोधकां संयुक्त रूप से कर रहे थे। धरना शांतिपूवर्क रहने से लोगों को किसी प्रकार की समस्या नहीं हुई।
धरने से पूर्व जाट समाज के लोग जाट धर्मशाला में सुबह नौ बजे एकत्रित हुए, जहां से विचार-विमर्श के बाद लघु सचिवालय पहुंचे और धरने-प्रदर्शन पर बैठ गए, लेकिन इसके लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी।
इस दौरान पुलिस बल की मुस्तैदी की गई थी। धरना शाम पांच बजे तक जारी रहा। प्रशासन ने धरने के लिए सोमवार से हुडा सेक्टर-19 में जगह उपलब्ध करवाई गई है। इस अवसर पर सर्व जाट संघ के प्रधान विकल पचार, कृष्ण ढाका, कृष्ण झोरड़, पुनीता रानी, प्रदीप सिंवर, विनोद ढाका, चिरंजी, ख्याली राम हंजीरा, धर्मवीर गोदारा, रविल सिंवर, प्रवेश सिंवर सहित कई लोग उपस्थित थे।
हुडा सेक्टर 19 में धरना आज से
पचार ने बताया कि अब सोमवार से हुडा सेक्टर 19 में धरना शुरू होगा, जिसमें रोटेशन के अनुसार गांवों के लोग धरने में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि जब तक झूठे मुकदमे खारिज नहीं होंगे, उनका धरना जारी रहेगा। दिनभर धरना शांतिपूर्वक चला, जिस कारण किसी को भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। वैसे भी रविवार को अवकाश होने के कारण लघु सचिवालय में कामकाज के लिए लोग नहीं आए।
डीसी से हुई कमेटी की वार्तालाप विफल
जाट समुदाय के लोगों को डीसी ने वार्तालाप के लिए बुलाया, जिसमें रणधीर जोधकां, विकल पचार, कृष्ण ढाका, कृष्ण झोरड़, विनोद झोरड़ शामिल थे। डीसी ने धरना न देने की बात कही, जिस पर कमेटी के लोगों ने झूठे मुकदमे वापस लेने की शर्त रख दी। प्रशासन की ओर से कहा गया कि उनके हाथ में कुछ भी नहीं है तो प्रतिनिधिमंडल ने आगे वार्ता करने से इनकार कर दिया। कमेटी में शामिल लोगों ने कहा कि वार्तालाप विफल रही और हम अब अपना धरना जारी रखेंगे।
अधिकारी और पुलिस बल मुस्तैद
जाट समुदाय के धरने से पूर्व ही लघु सचिवालय के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी। शाम को पांच बजे धरना समाप्त होने के बाद पुलिस के जवान वहां से रवाना हुए। धरने के दौरान एसडीएम परमजीत सिंह चहल, डीडीपीओ प्रीतपाल सिंह, डीएसपी विजय कक्कड़, तहसीलदार सहित अनेक अधिकारी दिनभर धरना स्थल पर पहुंचकर पल-पल की रिपोर्ट लेते रहे।
डीसी ने धरना हटाने के लिए दिया प्रलोभन : जोधकां
डीसी से बैठक करने के उपरांत रणधीर सिंह जोधकां ने आरोप लगाया कि बैठक में डीसी ने गांव में विकास कराने का प्रलोभन दिया, ताकि वे धरना न दें। उन्होंने कहा कि विकास करवाना सरकार की जिम्मेवारी है, लेकिन हम तो उन लोगों के खिलाफ बने मुकदमों को खारिज करने की मांग कर रहे हैं, जिन पर बिना किसी कसूर के लिए मामला दर्ज कर लिया गया।
जोधकां ने बताया कि गत वर्ष आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री ने सिरसा के लोगों पर बने मुकदमों को 15 दिन में वापस लेने का आश्वासन दिया था। क्योंकि सिरसा जिले में किसी प्रकार दंगे नहीं हुए थे और आंदोलन शांतिपूर्वक रहा था, लेकिन अब तक इस मामले में कोई जांच ही नहीं की गई।
सरकार कर रही जाटों के खिलाफ साजिश : पचार
विकल पाचर ने बताया कि झूठे मुकदमे वापस लेने के मामले में प्रशासन ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि सरकार नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार जाट समाज के युवाओं पर झूठे मुुकदमे बनाकर उन्हें नौकरी से वंचित रखने की साजिश रच रही है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी अपने हक मांगने का अधिकार है, लेकिन जाटों को धरना देने के लिए बोंड भरने पड़ रहे हैं, जबकि और कोई भी धरना दे तो किसी प्रकार के बोंड भरने की जरूरत नहीं होती। सरकार खुलेआम जाटों के साथ भेदभाव कर रही, जिसका खामियाजा आने वाले समय में सरकार को भुगतना होगा।
जाटों पर ही धारा क्यों: ढाका
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला महासचिव कृष्ण ढाका ने कहा कि धरने-प्रदर्शन तो आए दिन होते हैं, लेकिन प्रशासन कभी भी धारा 144 नहीं लगाता। लेकिन जब जाट समुदाय के लोग धरने देने की बात करते हैं तो न केवल धारा 144 लगा दी जाती है, बल्कि धरना देने के लिए बोंड भी भरवाए जा रहे हैं। ढाका ने कहा कि क्या जाटों को सरकार लोकतंत्र का हिस्सा नहीं मानती। इसी प्रकार जब डेरा प्रमुख की पेशी होती है तो कोर्ट के बाहर धारा 144 का उल्लंघन होता है, लेकिन प्रशासन मौन रहता है। इस देश में अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग कानून क्यों।
आंदोलन को लेकर सुरक्षा चाक चौबंद
जाट आंदोलन को लेकर शहर मेें सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। सुबह से ही डीएसपी विजय कक्कड़ के नेतृत्व में पुलिस फोर्स शहर भर मेें गश्त करती रही। जैसे ही जाट धर्मशाला में समुदाय के लोग एकत्रित होते दिखाई दिए, भारी पुलिस बल जाट धर्मशाला के बाहर तैनात कर दिया गया।
जाट समुदाय के लोग धरना देने के लिए रवाना हुए तो एसडीएम परमजीत चहल, डीएसपी विजय कक्कड़ पुलिस फोर्स के साथ लघु सचिवालय पहुंच गए। उन्होंने जाट नेताओं से से कहा कि यहां धरना देने की अनुमति नहीं है। अधिकारियों ने धारा 144 का हवाला दिया, लेेकिन जाट समुदाय के लोग लघु सचिवालय में दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए।
धरने के आसपास प्रशासन ने पुलिस बल तैनात कर दिया गया। प्रशासन की तरफ से धरने की वीडियोग्राफी करवाई गई। हर गतिविधि को वीडियो कैमरे में कैद किया जा रहा था। प्रशासन की तरफ से धरने पर बैठे लोगों से एक सरकारी दस्तावेज पर साइन करवाए गए, जिसमें लिखा था कि आंदोलन के कारण अगर किसी प्रकार से सरकारी, प्राइवेट संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया तो उसकी कीमत धरनारत लोगों से वसूल की जाएगी। धरना शांतिपूर्वक जारी रहने से प्रशासन ने शाम को राहत की सांस ली।