सिरसा। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक से महिलाओं की सूनी गोद भरने वाले जिले के प्राइवेट अस्पतालों का स्वास्थ्य विभाग ने रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। ऐसे में अब जो निजी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के मानकों के अनुसार खरे पाए जाएंगे, उनका ही रजिस्ट्रेशन होगा और अन्य सेंटरों पर कार्रवाई होगी। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 9 आईवीएफ सेंटर का निरीक्षण कर लिया है। अब आगामी दो दिनों में रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर रजिस्ट्रेशन होगा।
बता दें कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी संचालित आईवीएफ सेंटरों पर सहायक प्रजनन तकनीक यानी एआरटी और सरोगेसी अधिनियम 2023 के तहत रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र भादू ने बताया कि जिले में 11 आईवीएफ सेंटर के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया गया था। इसमें से 9 आईवीएफ सेंटर का निरीक्षण कर लिया गया है। निरीक्षण के दौरान मिली छोटी-मोटी कमियों को पूरा करने के लिए आईवीएफ सेंटरों के संचालकों को बोला गया है। वहीं, अन्य दो आईवीएफ सेंटर जिसमें एक सिरसा शहर और एक डबवाली में संचालित किया जा रहा है। इनका निरीक्षण करना अभी बाकी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आईवीएफ रजिस्ट्रेशन के लिए 2.5 लाख फीस निर्धारित की गई है। संवाद
इन आईवीएफ सेंटर का हुआ निरीक्षण
1.एपेक्स आईवीएफ प्राइवेट लिमिटेड सेंटर
2.स्पर्श यूरो गायनी और आईवीएफ सेंटर
3.नन्हें कदम आईवीएफ सेंटर
4.कंसीव आईवीएफ एंड फर्टिलिटी सेंटर
5.तलवाड़ अस्पताल एंड आईवीएफ सेंटर
6.वेल वूमेन क्लीनिक सेंटर
7. शिखा आईवीएफ सेंटर
8.सिरसा आईवीएफ सेंटर
9.तोमर नर्सिंग होम प्राइम फर्टिलिटी आईवीएफ सेंटर मंडी डबवाली
स्वास्थ्य विभाग करता है समीक्षा
सिविल सर्जन महेंद्र भादू ने बताया कि असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर कृत्रिम तरीकों से गर्भधारण करने वाले आईवीएफ सेंटरों का किसी तरह का रजिस्ट्रेशन न होने पर सिर्फ मासिक रिपोर्ट और समीक्षा ही हो पा रही थी। बिना मॉनिटरिंग सिस्टम और रजिस्ट्रेशन के लापरवाही पर कार्रवाई के अंतर्गत नहीं आते हैं। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से एआरटी एक्ट 2023 के तहत रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य किया गया है। बिना रजिस्ट्रेशन के आईवीएफ सेंटर पर ताला लगाया जाएगा और बिना अनुमति के संचालन करने पर जुर्माना और सजा का भी प्रावधान है।
निरीक्षण के लिए कमेटी गठित
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिला में संचालित आईवीएफ सेंटरों के निरीक्षण के लिए कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें जिला उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त सहित सिविल सर्जन नागरिक अस्पताल, डिप्टी सिविल सर्जन पीएनडीटी, आईएमए नॉमिनेटेड पर्सन, जिला प्रोग्रामर ऑफिसर डब्ल्यूसीडी शामिल हैं।
आईवीएफ सेंटर संचालन के लिए ये हैं अनिवार्य
आईवीएफ सेंटर के संचालन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, बायोवेस्ट सिस्टम, फायर सिस्टम, चिकित्सकों में गायनोकोलोजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट, भ्रूण विज्ञानी, पुरुष प्रजनन और मूत्र संबंधी समस्याओं के विशेषज्ञ और काउंसलर होने अनिवार्य हैं।
आईवीएफ के लिए ये मशीनरी जरूरी
माइक्रोस्कोप, इनक्यूबेटर, लेमिनर एयर फ्लो, स्पर्म काउंटिग चैबर, सेंटरीफ्यू, रेफ्रिजरेटर, ओवम इस्पीरेशन पंप, अल्ट्रासाउंड मशीन, टेस्ट ट्यूब वार्मर, एनेस्थीसिया पुनर्जीवन ट्रॉली होने चाहिए। इसमें से अगर किसी भी आईवीएफ सेंटर में कोई मशीनरी खराब या नहीं है तो उसका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा।
कोट्स
जिले में आईवीएफ सेंटर का रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है, क्योंकि रजिस्ट्रेशन होने के बाद इनकी मॉनिटरिंग व समीक्षा स्वास्थ्य विभाग पूर्ण रूप से कर पाएगा। इस दौरान अगर किसी मरीज के साथ कुछ गलत या अन्य किसी भी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है तो स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। जिले में संचालित सभी आईवीएफ सेंटर अपना रजिस्ट्रेशन समय रहते करवा लें। बिना रजिस्ट्रेशन सेंटर का संचालन नहीं होगा। -डॉ. महेंद्र सिंह भादू, सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल सिरसा।