सिरसा। नागरिक अस्पताल में एक माह पहले डिलिवरी के दौरान हुई बच्चे की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से गठित कमेटी ने वीरवार को पीड़ित पक्ष को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि एमसीएच यूनिट में तैनात एक महिला नर्स ने उनके साथ बदतमीजी की। अपना गुस्सा निकालने के लिए महिला नर्स ने जानबूझकर उनकी गंभीर प्रसूता की डिलिवरी को खराब किया है। इस कारण उन्हें एमरजेंसी में निजी अस्पताल में जाना पड़ा, जहां पर जांच के दौरान प्रसूता के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई।
सुकेरा खेड़ा गांव निवासी वीरा देवी ने बताया कि डबवाली में महिला चिकित्सक की तबीयत सही न होने के कारण 18 जुलाई को उसकी गर्भवती बहु को नागरिक अस्पताल रेफर कर दिया गया था। यहां उसकी बहु को भर्ती कर लिया गया। वीरा देवी के अनुसार शाम को तबीयत खराब होने पर उन्होंने स्टाफ नर्स को देखने के लिए कहा, जिस पर उसने गर्भवती को घुमाने का कह दिया। वीरा ने बताया कि जब उक्त स्टाफ नर्स से दोबारा बहु की तबीयत के बारे में पूछा तो उसने कमरे से बाहर जाने का कहकर बदतमीजी की। अगले दिन सुबह उनकी बहु को ड्रिप लगा दी गई। उन्होंने छुट्टी की बात की तो एमसीएच यूनिट के स्टाफ ने ऑपरेशन का कहकर उन्हें भर्ती रखने के लिए कहा। वीना देवी ने आरोप लगाया कि अगले दिन जब उसकी बहु को दर्द हुए तो उक्त नर्स ने तंज कसते हुए गर्भवती व उसकी स्वजन को केस खराब करने की धमकी दी। रात्रि करीब दो बजे उन्हें दूसरी नर्सों ने बताया कि गर्भवती के बच्चे की मौत हो चुकी है। बहु को बचाने के लिए निजी अस्पताल ले जाओ। इसके बाद वे बहु को लेकर निजी अस्पताल में दाखिल करवाया। यहां चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि शिशु की पेट में मौत हो चुकी है। उन्होंने ऑपरेशन कर प्रसूता की जान बचाई।
कोट्स
विभाग की कमेटी इस मामले की जांच कर रही है। यह विभाग का आंतरिक मामला है। इस बारे में वह ज्यादा जानकारी नहीं दे सकती। - डाॅ. समता, जांच अधिकारी