ओढां। सरकार द्वारा लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दम भरा जा रहा है। लेकिन स्थिति ये है कि सरकारी अस्पतालों में न ही तो पूरा स्टाफ है और न ही लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। इस विषय में जब ओढां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की वस्तु स्थिति देखी गई तो सरकार के दावे दम तोड़ते नजर आए। 37 गांवों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने वाले गांव ओढां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक न होने की वजह से महिला मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
उल्लेखनीय है कि सीएचसी ओढां के अधीन 3 पीएचसी केंद्र पड़ते हैं। जिसके चलते अधीनस्थ आने वाले गांवों से मरीज यहीं आते हैं। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को झेलनी पड़ रही है। ये महिलाएं अपने रोजमर्रा के चेकअप के लिए जब यहां आती हैं तो उनकी जांच के लिए कोई भी महिला चिकित्सक न होने की वजह से उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ती हैं। महिला चिकित्सक के अभाव में इन महिलाओं को मजबूरन निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
हालांकि यहां कुछ समय पूर्व एक महिला चिकित्सक थी, लेकिन उसका तबादला हो गया। जिसके बाद से यहां पर नई नियुक्ति नहीं की गई है। इसके अलावा सीएचसी में 7 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। जिनमें से एक चिकित्सक डेपुटेशन पर है तो वहीं 2 चिकित्सक छुट्टी पर चल रहे हैं। एसएमओ के पद पर डॉ. मंदीप भसीन हैं, लेकिन वे किन्हीं कारणों की वजह से ड्यूटी पर नहीं आ रहे। सीएचसी में दिनभर में 150 से 200 की ओपीडी रहती है। इसके अलावा आपातकालीन सेवाएं अलग से। चिकित्सक सामान्य मरीजों को तो देख लेते हैं, लेकिन यहां आने वाली महिला मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। वहीं लेबोरेट्री में लैब टेक्निशियन तो है, लेकिन समय पर न मिलने के चलते लोगों को परेशान होना पड़ता है।
कबाड़ बनी एक्स-रे मशीन
सीएचसी में एक रेडियोग्राफर की नियुक्ति होने के चलते यहां पर एक्स-रे भी होते थे। लेकिन रेडियोग्राफर के तबादले के बाद न केवल एक्स-रे सुविधा बंद हो गई बल्कि मौजूदा समय में एक्स-रे मशीन भी कबाड़ बन चुकी है। लोगों ने विभाग से मांग करते हुए कहा कि जब रेडियोग्राफर का पद स्वीकृत है तो एक्स-रे की सुविधा भी मिलनी चाहिए। लोगों को एक्स-रे सुविधा के अभाव में निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वैसे तो अन्य चिकित्सक हैं, लेकिन महिला चिकित्सक न होने की वजह से बड़ी परेशानी है। खासकर उन महिलाओं को ज्यादा परेशानी हैं जो गर्भवती हैं और नियमित जांच के लिए अस्पताल में आती हैं। ऐसे में मजबूरन निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। हमारी यही मांग है कि सीएचसी में महिला चिकित्सक की नियुक्ति होनी चाहिए ताकि लोगों को परेशानी न झेलनी पड़े। -- मनोहर लाल। फोटो- 47
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सीएचसी केंद्र में लोगों को जब पूरा इलाज ही नहीं मिलता तो फिर क्या फायदा। यहां पर लोगों को ज्यादातर रेफर ही किया जाता है। न तो यहां कोई महिला चिकित्सक है और न कोई एक्स-रे की सुविधा। सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का सिर्फ ढिंढोरा पीट रही है। यहां पर लेबोरेट्री तो है, लेकिन वहां लैब टेक्निशियन मनमर्जी से आता-जाता रहता है। ऐसे में सामान्य टेस्ट के लिए भी परेशान होना पड़ता है। इस बारे कई बार अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है।
-- कौर सिंह कुंडर। फोटो - 48
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अस्पताल में स्टाफ तो है, लेकिन 1-2 चिकित्सकों को छोड़कर अन्य मर्जी से आते-जाते हैं। लोगों को परेशान होना पड़ रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। अंदर लेबोरेट्री में कोई नहीं मिलता। छोटे टेस्ट करवाने के लिए भी परेशान होना पड़ता है। यहां पर स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ नाम की ही हैं। अधिकारियों को चाहिए कि समय-समय पर औचक निरीक्षण करते हुए लापरवाह स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई करे।
-- जगदीश सहारण। फोटो- 49
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ये सीएचसी केंद्र 37 गांवों को कवर करता है। दिनभर में काफी मरीज यहां पर आते हैं। ऐसे में यहां चिकित्सकों व तमाम सुविधाओं की पूर्ति होना जरूरी है। लेकिन न तो यहां पर महिला चिकित्सक है और न ही एक्स-रे सुविधा। जब लोगों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं ही नहीं मिल रही तो फिर सीएचसी केंद्र होने का क्या फायदा। सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे तो कर रही है, लेकिन स्थिति कुछ और ही है।
सतपाल बड़जाती। फोटो- 50