मलेरिया की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। इस जानलेवा बीमारी को फैलने से रोकने के लिए पहली बार काफी ठोस कदम उठाने के साथ-साथ जवाबदेही तय की गई है। पिछले वर्ष जिलेभर में जो लोग मलेरिया से ग्रस्त हुए उनका फॉलो किया गया है, राहत की बात यह है कि दवा लेने के बाद ये लोग फिर बीमार नहीं हुए। वर्ष 2015 में सिरसा मेें 603 लोगों को मलेरिया हुआ था। वर्ष 2016 में यह संख्या घटकर 112 रह गई। इसमें चिंताजनक बात यह है कि 112 मरीजों में से 57 मरीज केवल चोपटा क्षेत्र के थे। इसलिए स्वास्थ्य विभाग 2017 में अपना सबसे ज्यादा फोकस चोपटा क्षेत्र में लगा दिया है। प्रशासन ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए पहली बार ग्राम पंचायत से लेकर अधिकारियों तक की जवाबदेही तय कर दी है, ताकि लापरवाही की तनिक भी गुंजाइश न रहे। अगर लापरवाही सामने आई तो सीधा उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।
डेंगू-मलेरिया की रोकथाम हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच, स्वास्थ्य विभाग, पब्लिक हेल्थ विभाग, नगर परिषद, शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि जो भी नालियां बंद पड़ी है उसे खुलवाएं, ताकि नाली में पानी एकत्रित न हो। तालाब के आस-पास कचरा न फेंकने दें। ये पंचायत की जिम्मेदारी है कि तालाब में मछलियां जिंदा रहे, क्योंकि मछली मच्छर के लार्वा को खा जाती हैं। बरसात के दौरान गड्ढों में पानी भरेगा तो ग्राम पंचायत पंप के जरिए पानी की निकासी करेगी और सप्ताह में एक बार मिट्टी के तेल का छिड़काव नालियों व सेम ग्रस्त जमीन पर करवाना होगा। पब्लिक हेल्थ अधिकारी पानी की पाइप लाइनों की जांच कर रहे हैं। जहां पर भी पाइप लीकेज कर रही है उसे ठीक किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से हेल्थ वर्करों को बीमारियों को लेकर प्रशिक्षण दिए जाने की प्रक्रिया 16 मार्च से शुरू है जिसके तहत एडीज मच्छर का लार्वा मारने, लोगों को जागरूक करने, बीमारियों के लक्षण आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर जलभराव वाले स्थानों की पहचान करने के लिए कहा गया है, ताकि लार्वा और मच्छर पनपने से रोके जा सकें।
सेम समस्या न पैदा कर रखा है खौफ
जिले का चोपटा ब्लॉक सेम ग्रस्त है। यहां की जमीन में नमी और पानी हमेशा रहता है और इसी ने प्रशासन की परेशानी बढ़ा रखी है। पिछली बार सिरसा जिले में मलेरिया से ग्रस्त जितने रोगी सामने आए उनमें से आधे से ज्यादा चोपटा क्षेत्र के रहने वाले थे। इसका मुख्य कारण सेम के रूप में सामने आया। मच्छर पनपने के लिए नमी और पानी एकत्रित होना जरूरी होता है। इसलिए चौपटा में सेम के कारण मच्छरों की भरमार रहती है। जहां-जहां सेम है इन गांवों के सरपंच सप्ताह में दो बार यहां काला और मिट्टी के तेल का छिड़काव करेंगे। ग्रामीणों को भी इसके लिए जागरूक किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि घरों के आसपास सफाई के अलावा गांव के आस-पास भी गंदगी व पानी एकत्रित न होने दें।
छुट्टी के दिन कूलर में न दिखे पानी
प्रशासन की तरफ से तमाम सरकारी विभागों के अधिकारियों और स्कूल प्राचार्यों से कहा गया है कि जिस दिन छुट्टी हो उससे एक दिन पहले ही कूलरों से पानी निकाल लें। कूलर को अच्छी तरह साफ करके रखें। ऐसा न किया गया तो मच्छर के लार्वा को कूलर में पनपने में देर नहीं लगेगी। जिस विभाग के कार्यालय में कूलर और पानी की टंकी में लार्वा मिला तो उसपर जुर्माना ठोका जाएगा। उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ ने तमाम अधिकारियों के साथ बैठक करके स्पष्ट तौर पर यह निर्देश जारी किया। मलेरिया विभाग की टीम लगातार सरकारी दफ्तरों, प्राइवेट व सरकारी स्कूलों में जाकर औचक निरीक्षण करेगी।
शहर के संवेदशनशील इलाके
मलेरिया मामले में कुछ क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित किया है। इनमें खैरपुर, जेजे कॉलोनी, सिंगकाट मोहल्ला, चतरगढ़पट्टी, पीर बस्ती, थेहड़ मोहल्ला, गुरूदेग बहादुर नगर, शमशाबाद पट्टी, गोशाला रोड क्षेत्र, डबवाली क्षेत्र व नाथूसरी चौपटा क्षेत्र प्रमुख हैं।
मलेरिया के लक्षण
मलेरिया बुखार मच्छरों द्वारा फैलाई जाने वाली बीमारी है। मच्छर के काटने से ये फैलता है। बुखार के दौरान प्लेटलेट्स कम होना इसका मुख्य लक्षण हैं। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।
बुखार के साथ सबसे सामान्य लक्षण है सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और त्वचा का खराब हो जाना। कभी-कभी, यह लक्षण फ्लू के साथ मिलकर कंफ्यूज भी कर देते हैं।
अचानक तीव्र ज्वर के साथ शुरू होता है, पेट खराब हो जाना, उसमें दर्द होना, कमजोरी, दस्त लगना, ब्लेडर की समस्या, निरंतर चक्कर आना, भूख ना लगना भी इसके लक्षण हैं।
ये बरतें सावधानी
अपने कूलर के पानी को चैक करते रहें और सप्ताह में एक बार कूलर पूरी तरह खाली करके सुखाएं।
घर के पास टूटे हुए मटकों, गमलों, फूलदानों, टायरों आदि में पानी इकट्ठा नहीं होने दें।
घर की छत पर पानी नहीं रुकने दे।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा नहीं लें।
सतर्क हैं हम
पिछले साल की तुलना में अबकी बार हमने पहले ही ठोस व कारगर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जवाबदेही तय होने से ग्राम पंचायत से लेकर तमाम विभागों के अधिकारियों को अपनी भूमिका का पता है। लगातार ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सबसे ज्यादा फोकस चौपटा ब्लॉक में है। सेम के कारण यहां मच्छरों की भरमार रहती है, इन्हें पनपने से रोकने के लिए उपाय किए जा रहे हैं। मलेरिया विभाग अपनी भूमिका को लेकर पूरी तरह से सतर्क है।
-डॉक्टर दीप, जिला मलेरिया अधिकारी, सिरसा।