संवाद न्यूज एजेंसी
चोपटा। खरीफ फसल 2022 के बीमा क्लेम और मुआवजे की मांग को लेकर एक तरफ किसानों ने टोल प्लाजा जाम कर दिया तो दूसरी तरफ नारायण खेड़ा में महिलाओं ने धरने की कमान को संभाल लिया है। बुधवार को धरने की अध्यक्षता नाथूसरी कलां की सरपंच रीटा कासनियां ने की। जिले के 100 से अधिक गांवों की महिलाओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और धरने को सुचारू रूप से चलाया। वहीं आमरण अनशन पर बैठे सरपंच और किसानों का अनशन भी 51 सदस्य कमेटी ने खुलवा दिया, ताकि स्वास्थ्य अधिक खराब न हो सके।
नारायण खेड़ा जल घर में चल रहे बीमा क्लेम की मांग को लेकर धरना स्थल पर चार किसान भरत सिंह झाझड़ा, नरेंद्र पाल सहारण, दीवान सहारण और जयप्रकाश कासनियां पिछले 15 दिन से जल घर की टंकी पर चढ़े हुए हैं। बुधवार को किसानों के हाईव जाम करने के बाद नारायण खेड़ा में धरने की कमान किसान महिलाओं ने संभाली। सरपंच रीटा कासनियां, मनावती माखोसरानी, उर्मिला कैंरावाली, उन्नति बैनीवाल, अमन सहारण, सुनीता नारायण खेड़ा, उजाला, गुड्डी रायपुर सहित महिलाओं ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। महिलाओं ने सरकार विरोध गीत गए।
टंकी पर चढ़े किसान नरेंद्र पाल की माता हंसकर सहारण, दीवान सहारण की माता पार्वती, भारत सिंह झांझड़ा की माता भगवानी देवी और जयप्रकाश कासनियां की पत्नी सरोज भी पूरे दिन धरना स्थल पर डटी रहीं। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की जीत नहीं होगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि खेतों में काम का समय तो चल रहा है लेकिन किसानी को बचाने के लिए उनके घर से संघर्ष कर रहे पुरुषों पर उन्हें गर्व है।
ग्राम पंचायत ने धरना स्थल पर की लंगर की व्यवस्था
नारायण खेड़ा किसान धरने पर खाने पीने की व्यवस्था किसान संगठन और ग्राम पंचायतों द्वारा की जा रही है। दिन रात लंगर चलता रहता है। टंकी पर चढ़े चारों किसानों के लिए खाने-पीने का सामान बाल्टी के रस्सी बांधकर पहुंचाया जाता है।