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मकान में चल रही आइसक्रीम बनाने की फैक्टरी में विभाग का छापा

Thu, 30 Mar 2017 12:39 AM IST
amarujala/Sirsa
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Health Department Team
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शहर के रानियां रोड स्थित गली खाईवाली में एक मकान में चल रही चुस्की बनाने की फैक्ट्री पर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से छापेमारी की। इस फैक्टरी में विभिन्न रंगों की चुस्कियां तैयार की जाती हैं, जिसे सिरसा ही नहीं पंजाब और राजस्थान में सप्लाई किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने फैक्ट्री में मिले तमाम पदार्थों के सैंपल लिए, जिन्हें जांच के लिए चंडीगढ़ स्थित लैब में भेजा जाएगा और 15 दिनों में जांच रिपोर्ट आ जाएगी।
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बुधवार को किसी शख्स ने प्रशासन को सूचना दी कि गली खाईवाली स्थित एक मकान में चुस्की बनाने की फैक्टरी कई सालों से चल रही है। यहां हानिकारक रंगों का इस्तेमाल करके चुस्की बनाई जा रही है। इस सूचना के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर इंद्रजीत के नेतृत्व में टीम का गठन किया। इसके बाद शहर थाना प्रभारी राम सिंह के साथ मिलकर संयुक्त रूप से फैक्टरी में छापामारी की गई। डॉक्टर इंद्रजीत और बृजलाल ने फैक्टरी मालिक नंदलाल से पूछताछ कर यहां मिले तमाम पदार्थों के सैंपल लिए। इस दौरान डीएसपी हेडक्वार्टर विजय कक्कड़ भी मौके पर पहुंचे।

हानिकारक रंग और केमिकल का किया जा रहा प्रयोग
सूत्रों के अनुसार सिरसा शहर सहित आसपास के गांवों और कस्बों आदि में जो लोग साइकिलों और रेहड़ियों आदि पर कुलफियां बेचते हैं, उसे बनाने के लिए वे कथित रूप में मिलावटी दूध, खतरनाक रंग और चीनी की जगह सेक्रीन नामक केमिकल का प्रयोग करते हैं। यह भी मालूम हुआ है कि अधिकतर इस कारोबार से संबंधित लोग जिस लोहे के फ्रेम में कुलफियां आदि तैयार करते हैं, उनमें जंग लगा होता है। जिस पानी का इन पदार्थों को तैयार करने के लिए प्रयोग किया जाता है, वह भी स्वच्छ नहीं होता। दूध को गाढ़ा करने के लिए कथित रूप में लिटमस पेपर, कई तरह के तेलों और केमिकलों का प्रयोग किया जा रहा है। आइसक्रीम बनाने के लिए अधिकतर लोगों द्वारा जिस ड्राई फ्रूट का प्रयोग किया जाता है, वह घटिया क्वालिटी का होता है। इसके अतिरिक्त ब्रांडेड आइसक्रीम आदि के पैकेटों को छोड़कर किसी भी अन्य पैकिंग पर बनाने और खराब होने की तिथि तक नहीं लिखी होती।
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10 साल कैद तक की हो सकती सजा
जिले में जहां पर भी आइसक्रीम, कुलफी, बर्फ आदि बनाई जाती है, वहां जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीमें सैंपल लेंगी। सैंपल को जांच हेतु चंडीगढ़ भेजा जाता है। खाईवाली गली में स्थित फैक्ट्री में भी टीम ने सैंपल लिए हैं। 15 दिनों में इसकी रिपोर्ट आ जाएगी। रिपोर्ट में अगर गुणवत्ता कम पाई गई तो एडीसी कोर्ट में केस चलेगा, जिसमें जुर्माने का प्रावधान है और अगर रिपोर्ट अनसेफ आई, मतलब यानी चुस्की के निर्माण में येलो रंग इस्तेमाल हुआ पाया गया तो जिला अदालत में आरोपी पर केस चलेगा। इसमें 10 साल कैद तक की सजा हो सकती है। किसी नागरिक के पास अगर मिलावट संबंधित कोई जानकारी हो तो वे स्वास्थ्य विभाग को सूचित कर सकते हैं। उसका नाम गुप्त रखा जाएगा।
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डॉक्टर राजेश चौधरी, डिप्टी सीएमओ सिरसा
 
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