जाट आंदोलन के दौरान दर्ज किए मुकदमों को रद्द करने की मांग को लेकर वीरवार को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल डीसी और एसपी से मिला। उन्होंने ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि सिरसा में कहीं भी किसी प्रकार हिंसक घटना नहीं हुई और शांतिपूर्वक धरना दे रहे लोगों पर मुकदमे दर्ज कर दिए गए हैं। उन्होंने कमेटी का गठन कर कर प्रशासन को अवगत करवा दिया है।
जानकारी के अनुसार अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष शीशपाल झोरड़ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल डीसी व एसपी से मिला। उन्होंने ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि प्रदेश सरकार द्वारा कहा गया था कि जहां पर शांतिपूर्वक तरीके से आंदोलन हुआ, वहां पर लोगों पर बने केस वापस लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सिरसा जिला में आंदोलन पूर्णतया शांतिपूर्वक रहा, इसके बावजूद 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्वक तरीके से अपनी मांग को रखना सबका अधिकार है और ऐसे में दर्ज मुकदमों को वापस लिए जाएं।
इसी प्रकार एसपी को सौंपे गए ज्ञापन में मुकदमे वापस लेने की मांग के अलावा गठित की गई कमेटी के बारे में जानकारी दी गई। जिला प्रधान शिशपाल झोरड़ ने बताया कि गत 18 मार्च को पुलिस महानिदेशक और मुख्य सचिव से हुई बैठक में हमें निर्देश दिए गए थे कि जिला स्तर पर कमेटी का गठन किया जाए।
उन्होंने बताया कि यह कमेटी प्रशासन का आरोपियों की पहचान में सहयोग करेगी और निर्दोष पर केस बनने पर प्रशासन को अवगत करवाएगी। इसी प्रकार आंदोलन की आगामी गतिविधियों के बारे में प्रशासन इस कमेटी से जानकारी ले सकेगा। इस कमेटी में शिशपाल झोरड़, रणधीर जोधकां, वेद प्रकाश, विनोद ढाका, प्रवेश सिंवर, रामकुमार नैन, कृष्ण ढाका, विकल पचार, धर्मवीर गोदारा, वीरेंद्र न्यौल, सुधीर कुकणा, सत्यनारायण, विनोद बैनीवाल और यशवीर बैनीवाल को शामिल किया गया हैं।