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Sirsa News: भाषा और साहित्य के महत्व पर प्रकाश डाला

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सिरसा। पंजाबी भाषा पर आधारित कार्यक्रम में संबो​धित करते हुए ​शिक्षक। प्रवक्ता
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सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग की ‘साहित्य सभा’ की ओर से भाषा एवं साहित्य उत्सव का वीरवार को आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभाग की अध्यक्ष प्रो. रणजीत कौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुईं। उन्होंने विद्यार्थियों को भाषा और साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भविष्य के प्रति जागरूक किया।
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पंजाबी भाषा का अध्ययन न केवल सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करता है, बल्कि विद्यार्थियों को अध्यापन, अनुवाद, पत्रकारिता, लेखन, प्रशासनिक सेवाओं, मीडिया, रंगमंच और शोध के क्षेत्र में भी विस्तृत अवसर प्रदान करता है। इस अवसर पर सहायक प्रोफेसर गुरसाहिब सिंह ने कहा कि पंजाबी साहित्य की जड़ें सिंधु घाटी सभ्यता और प्राचीन लोक संस्कृति में पाई जाती हैं।

इसकी आधार भूमि पंजाब की बोलचाल की भाषा रही, जो लोकगीतों, कहावतों, दोहों और लोक कथाओं के रूप में विकसित हुई। 12वीं-13वीं शताब्दी में शेख फरीद के सूफी पद्य को पंजाबी साहित्य का प्रारंभिक स्वरूप माना जाता है। उनकी रचनाओं ने साहित्य में अध्यात्म, मानवीय करुणा और सामाजिक समानता का भाव भरा।
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इसके अतिरिक्त डॉ. चरणजीत कौर और डॉ. हरदेव सिंह ने भी अपने विचार साझा किए और विद्यार्थियों को साहित्य व शिक्षा की प्रेरणा दी। कार्यक्रम का संचालन द्वितीय वर्ष की छात्रा शिखा ने किया। प्रथम वर्ष की अमनदीप कौर ने भाषा और साहित्य की महत्ता पर अपने विचार व्यक्त किए, जबकि द्वितीय वर्ष के मनदीप सिंह ने साहित्यकारों को समर्पित अपनी लिखी कविता प्रस्तुत की।

इस अवसर पर विभाग में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। प्रतियोगिता में द्वितीय वर्ष की अमनदीप कौर, परवीन कौर और प्रथम वर्ष की अमनदीप कौर की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। द्वितीय स्थान पर प्रथम वर्ष की हुस्नदीप कौर, द्वितीय वर्ष की पूजा व ज्योति की टीम रही। वहीं तृतीय स्थान द्वितीय वर्ष की मेघा, प्रिया और प्रथम वर्ष की अनामिका की टीम ने हासिल किया। कार्यक्रम में विभाग की सहायक रमनदीप कौर भी मौजूद रहीं।
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