पिछले चार दिन में कुत्ते तीन जिंदा गायों को मारकर खा गए। जिसे लेकर लोगों में प्रशासन के प्रति गुस्सा व्याप्त है। ममेराबाई रोड पर रविवार रात्रि को लावारिस कुत्तों ने एक गाय को अपना निवाला बनाया। मंगलवार प्रात: करीब छह बजे वह दूसरी गाय को मारकर खा गए।
बुधवार प्रात: करीब चार बजे इन कुत्तों ने एक और गाय को अपना शिकार बनाया।
घटनास्थल के पास रह रहे गुरप्रीत सिंह ने बताया कि वे प्रात: करीब चार बजे गाय के रंभाने एवं कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनकर घटनास्थल की ओर दौड़े तो दर्जनों की संख्या में कुत्ते एक गाय को दबोचे हुए थे। मोहल्लावासियों ने एकत्रित होकर गाय को बचाने का प्रयास किया लेकिन तब तक यह गाय अत्यधिक जख्मी होने के कारण मर चुकी थी।
इसी प्रकार रविवार व सोमवार को भी रात्रि के समय दो गायों पर इन कुत्तों ने हमला किया था जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। गाय को छुड़ाने गए गुरप्रीत व अन्य लोगों पर भी ये कुत्ते झपट पड़े, जिसके बाद बड़ी मुश्किल से ये लोग जान बचाकर भागे।
लोगों ने इसकी सूचना सामाजिक संस्था गोपुत्र सेना को दी। जिस पर गोपुत्र सेना के राष्ट्रीय महासचिव अजय बाना, रामलाल, जैना सिह, धर्मवीर व सुरेश कुमार आदि मौके पर पहुंचे। गोपुत्र सेना के राष्ट्रीय महासचिव अजय बाना ने अपने साथियों सहित एसडीएम ऑफिस में ज्ञापन सौंपकर मांग की थी कि इस बेसहारा गोवंश को गोशाला भिजवाया जाए वहीं इन लावारिस खूंखार कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया जाए ताकि इस निरीह गोवंश को बचाया जा सके। अजय बाना ने बताया कि एसडीएम ने आश्वासन दिया कि पालिका प्रशासन को बेसहारा गोवंश को आवारा कुत्तों से बचाने के लिए पालिका प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं लेकिन आज बुधवार को फिर इन कुत्तों ने एक और गाय को काट खाया। गोपुत्र सेना के राष्ट्रीय महासचिव अजय बाना ने कहा कि यदि वीरवार दोपहर तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे अपने साथियों सहित एकत्रित होकर शहर में घूम रही सभी बेसहारा गायों को एकत्रित कर गोशाला कमेटी की छह एकड़ कृषि भूमि के प्रांगण में छोड़कर आएंगे वहीं धरना व प्रदर्शन कर प्रशासन को चेताएंगे।
पहले दूध में जहर देकर मारा गया था कुत्तों को
वर्ष 2004 में भी पांच गायों को कुत्तों ने काट खाया था। जिस पर पालिका प्रशासन ने जहर मिले दूध से पहले ही दिन करीब 150 कुत्तों को मारा था। यह अभियान करीब तीन दिन चला था। उस समय इन नरभक्षी कुत्तों से काफी हद तक छुटकारा मिल गया था लेकिन अब 11 वर्ष बाद वही हालात बन गए है। इन कुत्तों के कारण पशु-पक्षी तो क्या आम लोगों का भी घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है लेकिन पालिका प्रशासन ने इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया है।