निजी बसों को परमिट दिए जाने की नीति के विरोध में हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियन की हड़ताल दूसरे दिन मंगलवार को भी जारी रही। हड़ताल का मंगलवार को सिरसा में पूरा असर देखने को मिला। हड़ताल से परेशानी उन लोगों को हुई जिन्हें लंबे रूट की बसों में सवार होकर जाना था।
हड़ताल के कारण लोगों को परेशानी हुई। बस अड्डे के बाहर प्राइवेट बसें और अन्य वाहन खड़े थे। बस अड्डा परिसर में रोडवेज कर्मचारी सुबह से लेकर शाम तक धरने पर बैठे हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। सुरक्षा के लिहाज से काफी पुलिस फोर्स डीएसपी हेड क्वार्टर विजय कक्कड़ के नेतृत्व में पुलिस फोर्स बस अड्डा के अंदर और बाहर तैनात रही। सिरसा और डबवाली डिपो में 197 सरकारी बसें हैं जो लोकल रूटों पर और सिरसा से पंजाब, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान जाती हैं। इन लंबे रूटों पर बसों के नहीं चलने से दूसरे राज्यों में जाने वाले यात्रियों को परेशानी हुई। लोगों ने दिल्ली के लिए जाने वाली रेलगाड़ी में यात्रा की, जबकि अन्य रूटों पर यहां से ट्रेन की भी सुविधा नहीं है।
सुबह से शाम तक बस स्टैंड के बाहर यात्रियों को भटकते देखा गया। गर्मी के मौसम में बच्चों को लेकर महिलाएं वाहनों को तलाशती देखी गई। बस स्टैंड के इर्द-गिर्द अव्यवस्था न हो इसके लिए पुलिस कर्मी भी तैनात रहे। लोगों ने धूप में वाहनों का घंटों इंतजार किया। फसली सीजन होने के कारण लोगों को शहर में खरीददारी करने के लिए आना पड़ रहा है ऐसे में बस सेवा बंद होने से परेशानी हो रही है।
186 बसों के लगे रहे ब्रेक
सिरसा डिपो की 155 बसों से मंगलवार सुबह आठ बस ही रवाना हुई। डबवाली डिपो की 42 बसों में से सुबह तीन बस ही रवाना हुई। इन बसों को बीच रस्ते में रोक लिया गया। सिरसा के 175 में से 167 चालक हड़ताल पर रहे। इसी प्रकार 150 में से 142 परिचालकों ने हड़ताल में शामिल होकर अपना रोष जताया। डबवाली डिपो के 47 में से 44 चालक और 42 में से 39 परिचालक हड़ताल में शामिल हुए।
दो दिन में 28 लाख का नुकसान
हरियाणा रोडवेज सिरसा डिपो को दो दिन हड़ताल के चलते 28 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। सिरसा और डबवाली डिपो की 197 बसें लगभग 70 हजार किलोमीटर की दूरी करती हैं, लेकिन सोमवार व मंगलवार को कोई बस नहीं चली। सभी बसें कतार में डिपो के वर्कशॉप में खड़ी रही।
कर्मचारियों ने दिनभर सरकार को कोसा
बस स्टैंड के निकासी द्वारा पर कर्मचारियों ने अवरोधक लगाकर धरना जारी रखा। कर्मचारी नेता दिनभर सरकार को कोसते रहे और राहगीरों को बताते रहे थे कि उनके परेशानी की वजह वे नहीं बल्कि सरकार है। दूसरी ओर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए डीएसपी विजय कक्कड़, एसएचओ राम सिंह, नायब तहसीलदार सुरेंद्र मेहता और दमकल कर्मचारी डेेरा डाले हुए थे। मंगलवार को कुछ प्राइवेट बस संचालक भी रोडवेज कर्मचारियों के समर्थन में आए। उनका कहना था कि सरकार द्वारा नए परमिट दिए जाने से नुकसान तो उन्हें भी होगा।
निजी बस संचालकों की चांदी
दो दिवसीय हड़ताल के चलते निजी बस संचालकों और प्राइवेट वाहनों के चालकों ने इसका पूरा लाभ उठाया। लोकल रूटों पर सभी प्राइवेट बसें सवारियों से खचाखच भरी रही। हड़ताल का सीधा असर रेल परिवहन पर दिखाई दिया। टिकट काउंटरों व रेलगाड़ियों में दिनभर कतार लगी रही। सड़क पर अपर्याप्त परिवहन व्यवस्था के चलते अधिकतर यात्रियों ने रेलों में यात्रा की। प्राइवेट वाहनों को भी दिन भर फुर्सत नहीं मिली। किराया अधिक वसूल कर लोगों की जेबें ढीली की गई। आज सुबह विभिन्न डिपो की आठ बसें विभिन्न रूटों पर सिरसा से रवाना हुई उसके बाद कोई बस नहीं चली।