हरियाणा के सिरसा व फतेहाबाद के हालात में कोई सुधार नहीं है। फतेहाबाद के 80 और गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इससे प्रदेश में बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या 1378 पहुंच गई है। 24 घंटे में प्रदेश में चार लोगों की मौत भी हो गई। प्रदेश में अब तक 34 लोग जान गंवा चुके हैं। इधर, जीटी बेल्ट में फिलहाल राहत है। अंबाला को छोड़कर बाकी जिलों में पानी तेजी से उतर रहा है। इससे छह दिन बाद कैथल का पंजाब से संपर्क भी बहाल हो गया। कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में 150 फीट तक सड़क बहने से दर्जनों गांवों का संपर्क कट गया है।
सिरसा में पंजाब सीमा से लेकर राजस्थान सीमा तक 150 किलोमीटर के दायरे में घग्गर के साथ लगते 49 गांव खतरे में हैं। यहां पानी कम होने के बजाय एक से डेढ़ फुट तक बढ़ा है। गांवों के तटबंधों की निगरानी करने के लिए किसान दिन-रात यहां पर पहरा दे रहे हैं। रविवार देर रात सिरसा से सटे पंजाब के गांव झंडा खुर्द में घग्गर नदी के तटबंध में 50 फुट तक दरार आने से सिरसा के मुसाहिबवाला और बुर्जकर्मगढ़ समेत 15 से अधिक गांवों व 40 ढाणियों में पानी भर गया है। सिरसा से सरदूलगढ़ जाने वाले नेशनल हाईवे का पुल भी बैठ गया।
गांव अहरवा और शेखुपुर सड़क के उपर से गुजरता पानी। संवाद
मुसाहिबवाला-रंगा रोड भी पानी में बह गया। सिरसा के 20 गांवों में अलर्ट जारी किया गया है। यहां पानी कभी भी घुस सकता है। गांव सहारणी में घग्गर का तटबंध ओवरफ्लो हो गया और दरार आ गई। बिगड़ती स्थिति को देख प्रशासन ने एक अतिरिक्त एनडीआरएफ टीम बुलाई है। पानी कम करने के लिए हरियाणा-राजस्थान सीमा पर बने राज कैनाल के लोहे के चार गेट खोले गए हैं। घग्गर का पानी राजस्थान नहर में डालने के लिए यहां कई साल बाद रविवार को साइफन तोड़ा गया। प्रशासन के अनुसार, ज्यादा आबादी वाले क्षेत्र सुरक्षित हैं और साथ लगती ढाणियों को खाली करवाया गया है।
फतेहाबाद के 80 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में आने के बाद शहरों में भी खतरा बढ़ने लगा है। फतेहाबाद, टोहाना, भूना व जाखल में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। यहां भूना के हंसगा में 20 ढाणियों में बाढ़ से नुकसान हुआ है। फतेहाबाद शहर से मात्र 12 किलोमीटर की दूरी तक बाढ़ का पानी आ गया है। फरीदाबाद में यमुना में जलस्तर बेशक घट रहा है, लेकिन रिहायशी क्षेत्रों में भरा पानी अभी कम नहीं हुआ है। यहां यमुना की तलहटी में बसे रिहायशी क्षेत्रों बसंतपुर, ददसिया, अमीपुर सहित करीब 16 काॅलोनियों व 30 गांवों में पानी भरा हुआ है। पलवल में यमुना का जलस्तर अब कम होने लगा है। करीब दो फुट पानी नीचे आ चुका है, परंतु अब भी यमुना नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर है।
बाढ़ के पानी से बचने के लिए सड़क तोड़ने पर की फायरिंग
ढाणी संता सिंह वाली के समीप किसानों ने धान बचाने के लिए तटबंध बनाया जिसका दूसरे गांवों के लोगों ने विरोध किया। तकरार बढ़ने पर दोनों ओर से एक-दूसरे पर ईंटें बरसाई गईंं। वहीं, फतेहाबाद के गांव बबनपुर में लोगों ने बाढ़ से बचने के लिए सड़क तोड़ने का प्रयास किया तो, मुस्साखेड़ा के लोगों ने फायरिंग कर दी। इस मामले में रतिया पुलिस ने मुस्सखेड़ा के 100 से 150 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया है।