मंडी में भीगी धान की ढेरियां व बोरियां, किसानों और आढ़तियों को नुकसान की आशंका
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा/रानियां। शनिवार शाम को जिले में अचानक मौसम बदल गया। तेज हवाओं के साथ बादल छा गए और कई जगहों पर ओलावृष्टि हुई। इससे धान की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। मंडी में पड़ी धान की फसल भी बारिश में भीग गई।
रानियां, जीवन नगर, रंघावा और संगर साधा क्षेत्रों में बारिश के साथ ओलावृष्टि दर्ज की गई। करीब आधे घंटे तक बारिश हुई और लगभग पांच मिनट तक ओले गिरे। इस बेमौसमी बारिश ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है।
जिले में 70 फीसदी से ज्यादा फसल खुले में पड़ी थी। इससे नुकसान अधिक हुआ। खेतों में धान की कटाई का काम भी प्रभावित हुआ है। धान की फसल कटाई के अंतिम दौर में है। खेतों में नमी बढ़ने से अगले दो से तीन दिनों तक कटाई रुक जाएगी। इससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार पर बुरा असर पड़ने की आशंका है।
मंडियों में धान की सुरक्षा बनी चुनौती
मंडी में धान लेकर पहुंचे किसानों और आढ़तियों के सामने फसल को सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती है। खुले में रखीं धान की ढेरियां और बोरियां भीगने से नमी बढ़ गई है। इससे धान की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। धान की बिक्री, उठान और भंडारण की प्रक्रिया भी धीमी पड़ सकती है। किसानों और आढ़तियों को अब धान सुखाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे।
मौसम में बदलाव और ठंड की संभावना
अक्तूबर माह में जिले में पहले भी दो बार हल्की बारिश हो चुकी है। बारिश के कारण तापमान में लगातार गिरावट आई है। दो दिनों से तापमान 32 डिग्री के आसपास बना हुआ था। शनिवार को मौसम बदलने से तापमान 4 डिग्री तक गिर गया। ओलावृष्टि के बाद अब दिवाली तक सर्द मौसम तेजी से आएगा। ठंडा मौसम गेहूं की फसलों की बिजाई के लिए बेहतर होगा।
धान खरीद पर फिर पड़ेगा असर
दो दिनों से बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण मंडियों में धान की खरीद लगभग बंद थी। जेनरेटर का खर्च आढ़तियों को महंगा पड़ रहा था। शनिवार को मंडियों में धान की आवक बढ़ी और उठान का काम भी तेजी से चला। हालांकि, बारिश के बाद धान खरीद का काम फिर से धीमा हो जाएगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक केवल 40 फीसदी धान ही मंडियों में पहुंचा है। इस बार दिवाली व उसके बाद तक धान की फसल मंडी में आती रहेगी।