डेरा सच्चा सौदा के स्थापना दिवस पर शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहे डेरामुखी ने अनुयायियों में नाम भेजे पत्र में साफ कर दिया कि वे ही गुरु गद्दी पर बने रहेंगे। पिछले काफी समय से कभी उनके पुत्र तो कभी हनीप्रीत को गद्दी पर बैठाने की चर्चाएं चल रही थीं।
स्थापना दिवस कार्यक्रम में परिवार के सदस्यों में केवल दत्तक पुत्री हनीप्रीत और डेरामखी के दामाद ही नजर आए। डेरामुखी ने बाहर आने का संकेत देते हुए पत्र में लिखा कि सेवादारों की जायज मांग सतगुरु जरूर पूरी करेंगे। कार्यक्रम के दौरान डेरामुखी का पत्र पढ़कर सुनाया गया। डेरामुखी ने माता, अनुयायियों और ट्रस्ट प्रबंधकों, सेवादारों को संबोधित करते हुए पत्र में संदेश दिया।
सबसे पहले स्थापना दिवस की बधाई दी। उन्होंने पत्र में लिखा कि परम पिता ने हमें गुरु बनाया था, गुरु हैं और हम ही गुरु रहेंगे। साथ ही अनुयायियों को कहा कि किसी के भी बहकावे में ना आएं। डेरामुखी ने कहा कि वचन सिर्फ और सिर्फ गुरु के ही होते हैं, बाकी सबकी तो सिर्फ बातें होती हैं। उन्होंने संदेश दिया कि गुरु वचन, गुरु को सतगुरु जी हुक्म देकर करवाते हैं, ना कि गुरु किसी भी बंदे के कहने पर करते हैं।
पत्र में डेरामुखी ने एक ओर जहां फिर जेल से बाहर आने का संकेत दिया तो वहीं अनुयायियों के नाम कई संदेश दिए। इसके अलावा पंजाब चुनाव के दौरान दो फाड़ हुए डेरा अनुयायियों को लेकर भी आह्वान किया कि केवल गुरु के वचन मानो, किसी दूसरे के नहीं। गौर हो कि डेरामुखी गुरमीत सिंह हत्या और यौन शोषण मामले में सजा काट रहा है।
कार्यक्रम से दूर रहा परिवार
डेरा का ये कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जाता है। कार्यक्रम से पहले कई राज्यों में कार्यक्रम हुए लेकिन इतने बड़े कार्यक्रम में डेरामुखी के परिवार के सदस्य नजर नहीं आए। माता, पत्नी, पुत्रियां, पुत्र और बच्चे इस कार्यक्रम से दूर ही रहे। केवल दामाद डॉ. शान-ए-मीत और दत्तक पुत्री हनीप्रीत ही कार्यक्रम में नजर आए।
पंजाब चुनाव में दो फाड़ का दर्द छलका, बोले- जो निंदा करता है, उसकी न सुनो
पंजाब चुनाव में इस बार डेरा अनुयायी दो फाड़ नजर आए। अनुयायियों का एक गुट डेरा प्रबंधन की बात सुन रहा था जबकि दूसरा गुट इसका विरोध कर रहा था। इसका परिणाम भी चुनाव पर दिखाई दिया। यानी डेरा का वोट बैंक चुनाव परिणाम पर ज्यादा असर नहीं दिखा पाया। इसलिए डेरामुखी ने पत्र में इस संबंध में भी संदेश दिया।
डेरामुखी ने पत्र में लिखा कि केवल अपने गुरु के वचन सुनो, ताकि आप जीते जी गम, दुख, चिंता और रोगों से मोक्ष प्राप्त करें। जो किसी की भी निंदा करता है, न तो उसकी बात सुनो और न ही उसकी बातें में हां में हां मिलाओ।