फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चकजालू में एक साल में तीन गुना पैदा हुईं बेटियां

Thu, 14 Jan 2016 11:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
विज्ञापन
विज्ञापन
हरियाणा में एक गांव ऐसा भी है, जिसमें कोई अंगूठा छाप नहीं है। आज तक ग्रामीणों पर पुलिस में कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। न ही कोई बैंक का कर्जदार है।
विज्ञापन


सौ फीसदी ग्रामीण बिजली बिल भरते हैं। गांव में कोई कच्चा घर नहीं, प्रत्येक गली पक्की है। ग्रामीण नशा नहीं करते, इसलिए शराब का ठेका भी नहीं है। यहीं नहीं अब यह गांव सबसे ज्यादा बेटियां लेकर आया है। स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2015 के आंकड़े पेश किए हैं, जिसके अनुसार इस गांव का लिंगानुपात 1000 : 2250 है।

हम बात कर रहे हैं गांव चकजालू की। डबवाली-ऐलनाबाद रोड स्थित यह गांव शहर डबवाली से करीब 28 किलोमीटर दूर है। गांव चकजालू करीब 125 साल पुराना है।

सबसे खास बात यह कि आज तक इस गांव का कोई मामला पुलिस में नहीं गया है। वर्ष 2014 में गांव को पूर्ण साक्षर होने का दर्जा मिला था। एक साल बाद इसका रिजल्ट सामने आया है। यह गांव सबसे अधिक बेटियां लेकर टॉप पर है।
विज्ञापन


विवादों को पंचायती समझौते से सुलझाने के लिए भी चर्चित
बच्चों को पढ़ाने, निर्मलता और बगैर पुलिस में शिकायत किए विवाद को पंचायती समझौते से निपटाने के लिए यह गांव काफी चर्चा में रहा है। इस बार यह सबसे ज्यादा बेटियों वाला गांव बन गया है।

13 बच्चों में 9 बेटियां हुईं पैदा
जनवरी से दिसंबर 2015 तक इस गांव में 13 बच्चों ने जन्म लिया। चार लड़के हुए, जबकि नौ बेटियां पैदा हुईं। लिंगानुपात सुधार के मामले में चकजालू ने लंबी छलांग लगाई है। खंड डबवाली के 48 गांवों में टॉप पर पहुंच गया है। वर्ष 2014 में गांव का लिंगानुपात 1000 : 1250 था।

इस बार सबसे अधिक बेटियां लाने वाला यह गांव अपनी खूबियों के लिए जाना जाता है। गांव चकजालू की स्थापना 1889 में हुई थी।

स्थापना से अब तक गांव के किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई। तब से लेकर आज तक प्रत्येक छोटे-बड़े झगड़े को पंचायत के जरिये निपटाया जाता है।

वर्तमान समय में झगड़ों को निपटाने के लिए 11 सदस्यीय कमेटी बनी हुई है। वर्ष 2014 में ही यह गांव संपूर्ण साक्षर गांव बन गया था। गांव का 90 साल का वृद्ध भी पढ़-लिख सकता है।

जालू चक्क से चकजालू तक का सफर
साल 1889 में चकजालू को जालू चक्क के नाम से जाना जाता था। गांव का नाम जालू सुथार नामक एक व्यक्ति के नाम पर पड़ा। इस व्यक्ति ने रिसालिया खेड़ा गांव की हद पर अपनी झुग्गी-झोपड़ी बनाई थी। इसके बाद धीरे-धीरे आबादी बढ़नी शुरू हो गई।

गांव को मिले पुरस्कार
साल 2006 में सरकार ने छह से 14 वर्ष की आयु तक के बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए अभियान की शुरूआत की थी। गांव चकजालू ऐसा पहला गांव है, जिसके सभी बच्चे पढ़ने के लिए स्कूल जाते हैं। साल 2008 में सरकार ने चकजालू को निर्मल गांव पुरस्कार से सम्मानित किया था।
विज्ञापन


गांव की एकता को बनाए रखने के लिए भारत सरकार के पंचायती राज विभाग ने गांव को सम्मानित किया।
साल 2008 में बेहतरीन कार्य के लिए गांव की पंचायत को संसद में जाने का मौका मिला। राष्ट्रीय स्तर पर पंचायत सम्मानित हुई।

इस बार गांव चकजालू का लिंगानुपात 1000 : 2250 है, जोकि खंड डबवाली में टॉप पर है। वर्ष 2014 में 1000 :1250 था। लिंगानुपात सुधार में इस गांव ने काफी ऊंची छलांग लगाई है। -एमके भादू, एसएमओ डबवाली
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें