संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। प्रदेश में बेसहारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान गोसेवा आयोग खुद करेगा। हर साल लगने वाले बेसहारा पशु पकड़ने के ठेके अब नगर परिषद और पालिकाओं को नहीं दिए जाएंगे। शहरी स्थानीय निकाय के हाल ही में जारी आदेशों के बाद इस पर रोक लगा दी गई है।
अब बेसहारा पशु पकड़वाने के लिए कोई टेंडर प्रक्रिया नगर परिषद व पालिकाएं नहीं कर सकती हैं। नगर परिषद की ओर से लगाए गए 2500 पशु पकड़वाने के टेंडर को रद्द कर दिया गया है। अब प्रशासन प्रदेश स्तर पर गोसेवा आयोग की ओर से पकड़वाए जाने वाले बेसहारा पशुओं की प्रक्रिया का इंतजार करेगा। यह नहीं व्यवस्था लागू कर दी गई है।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के जारी पत्र में कहा गया है कि बेसहारा पशुओं को पकड़वाने पर प्रति पशु 800 रुपये गोसेवा आयोग खर्च करने जा रहा है। निगम, परिषद और पालिकाओं में 2500 से 2950 प्रति पशु के हिसाब से खर्च किए जा रहे थे।
गोसेवा आयोग की ओर से प्रति पशु के हिसाब से रुपये गोशालाओं को जारी किए जाते हैं। हाल ही में गोशालाओं को पशुओं के हिसाब से रुपये जारी किए गए हैं। जिले में भाजपा जिलाध्यक्षों ने यह रकम चेक के माध्यम से गोशाला प्रबंधकों को दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गोशालाओं के पशुओं की सही मायने में मॉनिटरिंग के लिए यह कदम उठाया गया है। गोशालाओं में कितने पशु पहुंचते हैं, उनमें से कितनों की मौत हो गई। कितने नए बछड़े या बछड़ी ने जन्म लिया है।
गोशालाओं में पहले पशुओं की स्थिति क्या रही है। गोशालाओं को स्वालंबन की दिशा में कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है। सभी आंकड़ों की गणना करने के बाद यह निर्णय लिया गया है।