- क्रोशिया से सामान बनाकर चला रहीं अपनी आजीविका
- क्रोशिया से सूटों पर कढ़ाई, डेकोरेशन का सामान, लड्डू गोपाल की ड्रेसेज बना रहीं
फोटो- 22
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास के बल पर यदि कोई महिला अपने पैरों पर खड़ी होने का संकल्प ले ले, तो वह न केवल अपना जीवन बदलती है, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बन जाती है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है डबवाली की गीता रानी की, जो पिछले 11 वर्षों से क्रोशिया कला के माध्यम से न सिर्फ अपनी आजीविका चला रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखा रही हैं।
गीता रानी क्रोशिया से बनाए गए हस्तनिर्मित उत्पादों का कार्य घर से ही करती हैं। वह ऊन के माध्यम से सूटों पर कढ़ाई, डेकोरेशन का सामान, लड्डू गोपाल की आकर्षक ड्रेसेज, दस्ताने, जुराबें, छोटे बच्चों के सूट, झूले, चूड़ियां, हैंड ब्रेसलेट, बैग, रबर, स्लीपर्स और मोबाइल कवर जैसे अनेक उत्पाद तैयार करती हैं। इसके अलावा, त्योहारों के अनुसार विशेष वस्तुएं भी बनाती हैं। करवाचौथ के अवसर पर उनके द्वारा बनाई जाने वाली स्पेशल थाली, गुलदस्ते और सजावटी सामान की विशेष मांग रहती है।
11 साल पहले शुरू किया था काम
गीता रानी बताती हैं कि उन्होंने यह काम लगभग 11 साल पहले छोटे स्तर पर शुरू किया था। शुरुआत में यह केवल शौक था, लेकिन धीरे-धीरे लोगों की पसंद और मांग को देखते हुए यह उनकी आजीविका का मुख्य साधन बन गया। आज उनके बनाए उत्पाद न केवल डबवाली बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी पसंद किए जाते हैं। सोशल मीडिया और व्यक्तिगत संपर्कों के माध्यम से उन्हें लगातार ऑर्डर मिलते रहते हैं।
10 महिलाएं साथ मिलकर कर रहीं काम
स्वावलंबन की इस यात्रा में गीता रानी ने केवल अपने बारे में नहीं सोचा, बल्कि अन्य महिलाओं को भी इस हुनर से जोड़ने का संकल्प लिया। वर्तमान में उनके साथ करीब 10 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जिन्हें वह घर बैठे क्रोशिया का काम सिखा रही हैं। ये महिलाएं अपने घरेलू दायित्वों के साथ-साथ खाली समय में यह काम कर रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
हाथों से ही होता है काम
गीता रानी का कहना है कि क्रोशिया का काम कम लागत में शुरू किया जा सकता है और इसके लिए किसी बड़े स्थान या मशीन की आवश्यकता नहीं होती। केवल ऊन, सुई और धैर्य की जरूरत होती है। यह काम विशेष रूप से महिलाओं के लिए उपयुक्त है, क्योंकि इसे घर पर रहकर आसानी से किया जा सकता है। इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में योगदान दे पाती हैं।