इस बार मानसून की कमी के साथ-साथ घग्घर नदी में भी पानी न आने के कारण किसानों की चिंता और बढ़ गई है। आमतौर पर घग्घर में जून माह में पानी आ जाता है पर इस बार जुलाई माह आधे से ज्यादा बीत जाने के बावजूद पानी नहीं आया है। अब तो सिंचाई विभाग के अधिकारी भी मानसून की बाट देखने लगे हैं ताकि नहरों व नदियों में पानी आ जाए। गत वर्ष धान के भाव अधिक होने के कारण इस बार किसानों ने धान अधिक लगाए थे पर नहरी पानी के साथ-साथ घग्घर में पानी न आने के कारण फसलें सूखने लगी हैं। अब तक घग्घर में जरा भी पानी नहीं आया है।
किसानों की जीवनदायिनी के रूप में जानी जाने वाली घग्घर नदी भी सूखे की स्थिति से राहत नहीं दिला पा रही है। जिले के किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए वर्षों से घग्घर के पानी का सहारा मिलता रहा है पर इस बार मानसून की कमी ने किसानों को मायूसी के सिवाय कुछ नहीं दिया है। जिले में घग्घर नदी से 12 छोटी-बड़ी नहरें निकाली गई हैं, जो नदी से दूरदराज क्षेत्र में फसलों को सिंचाई में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इस बार घग्घर में पानी न आने के कारण ये सभी नहरें सूखी पड़ी हैं। इन नहरों से सिंचाई करने वाले किसानों की फसलें सूखे की चपेट में आ रही हैं। वर्ष 1999 से 2004 तक तत्कालीन मुख्यमंत्री चौटाला ने घग्घर के फालतू पानी का सदुपयोग करने के लिए घग्घर से कई नहरें निकलवाई थी जिसके बाद उस क्षेत्र में फसलों का उत्पादन बढ़ा था जहां पर कभी नहरी पानी नसीब नहीं होता था। इतने वर्षों बाद घग्घर के पानी से सिंचित होने वाले क्षेत्र में अकाल जैसी गंभीर स्थिति बनती जा रही है।
घग्घर जल सेवा मंडल के कार्यकारी अभियंता एनके भोला ने बताया कि फिलहाल नदी में पीछे भी पानी की कमी है। थोड़ा बहुत आता है तो पंचकूला डेम में ही रोक लिया जाता है। अब तो अच्छी बारिश से ही नदी में पानी आ सकता है। घग्घर में पानी आने के बाद ओटू हेड पर पानी का स्टॉक कर नहरों में छोड़ा जाएगा। किसान पूछताछ करने पहुंच रहे हैं पर यह तो हमें भी नहीं पता कि घग्घर में पानी कब आएगा। आमतौर पर जून माह में घग्घर में पानी आ जाता है, जिससे जिले में विभिन्न नहरों के माध्यम से किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है। प्रशासन तो बाढ़ की स्थिति से निपटने की तैयारी में बैठा है पर नदी में पानी सिंचाई के लायक भी नहीं आया है। यह सही बात है कि घग्घर नदी से निकलने वाली नहरों के क्षेत्र में पानी की कमी से फसलें खराब होने लगी हैं।