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Sirsa News: जिले की 1378 आंगनबाड़ी केंद्रों में पिछले तीन साल से नहीं आया गैस सिलिंडर व खाने बनाने का पैसा

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सिरसा। महिला एवं बाल विकास विभाग पिछले तीन साल आंगनबाड़ी केंद्रों को गैस सिलिंडर तक उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है। जिसके कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए नौनिहालों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाना टेढ़ी खीर साबित है रहा है। बच्चों को भोजन उपलब्ध करवाने के लिए उन्हें अपने स्तर पर जुगाड़ करना पड़ रहा है।
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बता दें कि जिले में विभाग की ओर से कुल 1378 आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित किए गए हैं। हर केंद्र में करीब 20 से 30 नौनिहाल रोजाना क-ख-ग सीखने के लिए आते हैं। वहीं इन आंगनबाड़ी केंद्रों पर करीब 2500 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व हेल्पर्स नौनिहालों की देखभाल करती हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की माने तो जिले में पिछले 3 साल से गैस सिलिंडर भरवाने का पैसा जारी नहीं हुआ है। जिसके कारण उन्हें खाना बनाने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।
आंगनवाडी कार्यकर्ताओं का कहना है कि खाना बनाने के लिए वे स्वयं अपने पैसों से सिलिंडर भरवाती हैं, ताकि कोई बच्चा भूखा न रहे। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वो अपने पैसों से आखिर कब तक सिलिंडर भरवाएंगी। वहीं विभाग को बार-बार कहने पर भी किसी समस्या का हल नहीं हो रहा है। कार्यकर्ताओं की माने तो अगर यही हालात रहे तो जल्द ही आंगनबाड़ी केंद्र बंद हो जाएंगे।
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मसाले व फ्लैक्सी फंड भी नहीं भेज रहा विभाग
विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों में मसालों जैसे नमक, मिर्च, हल्दी, जीरा का भी पैसा नहीं आ रहा है। बेसिक मसाले भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता स्वयं अपने खर्चें पर ही ला रही है। वहीं विभाग की ओर से एक फ्लैक्सी फंड दिया जाता है। जिसमें केंद्रों पर झाड़ू, पौछा, बर्तन, सिलिंडर व अन्य सामान लाया जाता है। ये फंड भी पिछले 3 साल से नहीं आ रहा है। वहीं पिछले 2 साल गर्भवती महिलाओं की विभाग की ओर से गोद भराई भी नहीं की गई है।
बच्चों को इस प्रकार दिया जाता है पौष्टिक आहार
- सोमवार को मीठा दलिया
- मंगलवार को पूरी-आलू की सब्जी
- बुधवार को मीठे चावल
- वीरवार को नमकीन दलिया
- शुक्रवार को परांठा, आलू की सब्जी
- शनिवार को पुलाव
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जिले की सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पिछले 3 साल से सिलिंडर भरवाने का पैसा नहीं आया है। जिसके कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्वयं के पैसों सिलिंडर भरवाने पड़ते हैं। इसके अलावा और भी बहुत से ऐसे पैसे है जो विभाग नहीं दे रहा है। कार्यकर्ता खुद के पैसों से आखिर कब तक आंगनबाड़ी को चला पाएंगी।
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-प्रमिला देवी, जिला प्रधान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सिरसा।
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