संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। गांव जगमालवाली स्थित मस्ताना शाह बलोचिस्तानी आश्रम की गद्दी के विवाद व संत वकील साहिब की मौत के मामले में रविवार को नया मोड़ आया है। जहां एक और तीन गांव के मौजिज लोगों ने पूर्व डेरा प्रमुख मैनेजर साहिब के भतीजे गुरप्रीत सिंह को डेरा प्रमुख घोषित कर दिया, वहीं संत वकील साहिब के बेटे ओमप्रकाश, भांजे संजय सिंह, भतीजे विष्णु ने मीडिया के सामने आकर कहा कि सोशल मीडिया पर आकर संत वकील साहिब के 21 जुलाई को चोला छोड़ने का दावा किया जा रहा है, जो सरासर गलत है। विष्णु ने कहा कि वह स्वयं 31 जुलाई को मिले थे, जिस समय संत वकील साहिब की सांसें चल रही थी। अभी डेरे में वकील साहिब की रस्म क्रियाएं चल रही हैं। ऐसे में डेरे की गद्दी को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। आज भी कुछ लोगों ने कमेटी गठित कर नए डेरा प्रमुख की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि हमारा डेरे से कोई लेना देना नहीं है। हम बस यही चाहते है कि वकील साहिब ने जिस डेरे में शिक्षा दी, उसका नाम खराब नहीं होना चाहिए। गद्दी का फैसला साध संगत व ट्रस्टी करेंगे।
वहीं अमर सिंह ने नए डेरा प्रमुख गुरप्रीत सिंह को बनाने के निर्णय को सही बताया है। उन्हाेंने कहा कि संत वकील साहिब के 21 जुलाई को चोला छोड़ने की बात वे नहीं कह रहे ये तो डाक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट कह रही है। परिवार के लोग सीधेतौर पर दबाव में झूठ बोल रहे हैं।
दूसरी ओर तीन गांवों के सरपंचाें ने डेरे को अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह डेरा प्रमुख को लेकर कोई पंचायत नहीं करेंगे। डेरा प्रमुख को फैसला करने का अधिकार डेरे की संगत और ट्रस्टियों को है। आज के घटनाक्रम से उनका कोई लेना देना नहीं है।
डेरे के ट्रस्टी सामने क्यों नहीं आ रहे हैं : विष्णु
वकील साहिब के बेटे ओमप्रकाश, भांजे संजय सिंह, भतीजे विष्णु ने कहा कि गलत बातों को फैलाने में ज्यादा वक्त नहीं लगता है। सच्चाई को सामने आने में वक्त लगता है। जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी। मैनेजर साहिब और वकील साहिब हो दोनों के समय में डेरे में ट्रस्टी बने हुए हैं। वह सामने क्यों नहीं आ रहे हैं। पुलिस से अपील है कि उन्हें सुरक्षा देकर संगत के सामने लाया जाए। आज हम परिवार के तीन लोग हैं। हमारा डेरे की गद्दी से कोई मतलब नहीं है। मौजूदा समय में डेरे के हालात बहुत खराब है। जिनके पास वसीयत है, वह डेरे में पहुंचे और सच्चाई सामने लाए।
राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ा, ऐसे ही किसी को नहीं दी जा सकती गद्दी
विष्णु ने कहा कि अमर सिंह वकील साहिब के भतीजे नहीं है, वह उनके पड़ोसी हैं। उन्हें विरेंद्र सिंह से ईष्या है। क्योंकि उन्होंने वकील साहिब से मिलने के लिए विरेंद्र को फोन किए थे। विरेंद्र सिंह ने फोन नहीं उठाए और वह वकील साहिब से मिल नहीं पाए। जिस समय वकील साहिब वसीयत लिखवा रहे थे, उस समय उनके करीबी सुमेर सिंह मौजूद थे। वे सच्चे इंसान है और डेरे को उन्होंने 13 से 14 एकड़ जमीन दान में दी है। वह सामने आकर वसीयत की सच्चाई बताएं, संगत को संतुष्ट करें। परिवार के सदस्यों ने कहा कि डेरे में कुछ लोगों ने कमेटी बनाकर नये डेरा प्रमुख की घोषणा की है। मौजूदा समय में डेरे में बड़े स्तर पर राजनीति चल रही है और राजनीतिक हस्तक्षेप भी बढ़ गया है। ऐसे ही किसी को गद्दी नहीं दी जा सकती है।
गद्दी को लेकी संत वकील साहिब से नहीं हुई बात
विष्णु ने बताया कि डेरे की गद्दी को लेकर उनकी कभी संत वकील साहिब से कोई बात नहीं हुई। कुछ साल पहले उन्होंने उन्हें एक डायरी दिखाई थी और बताया था कि विरेंद्र सिंह एक लाख रुपये दान डेरे को देता है। गुरुग्राम में उसका पेट्रोल पंप है। विरेंद्र सिंह ने उनके 25 साल तक सेवा की है। उन्होंने कहा कि विरेंद्र सिंह के नाम वसीयत है तो वह डेरे में आए और संगत की संतुष्टि करें। संगत की संतुष्टि ही सबसे बड़ा निर्णय है। संगत को ही निर्णय लेना है। संत वकील साहिब ने विरेंद्र सिंह को गद्दी सौंपने की घोषणा नहीं कर पाए। जैसे मैनेजर साहिब ने वकील साहिब को गद्दी देते हुए की थी।
मेरी विरेंद्र सिंह के साथ कोई नाराजगी नहीं है। न पहले रही है और न आगे रहेगी। परिवार के लोग सीधे तौर पर दबाव में झूठ बोल रहे हैं। 21 जुलाई को चोला छोड़ने की बात मैं नहीं कहता, डाक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट कह रही है। संत वकील साहिब और हमारे परिवार का 200 साल पुराना आना जाना है। हम एक ही परिवार है। गुरप्रीत सिंह भी संत वकील साहिब के करीबी रहे हैं। वे भजन मंडली में शामिल रहे है और डेरे में ही पले बड़े हैं। वह पूर्व डेरा प्रमुख मैनेजर साहिब के भाई के बेटे हैं। उनको बनाया गया है, यह सही है। डेरे में मौजूद दो से तीन हजार संगत ने अपने दोनों हाथ खड़े कर उन्हें डेरा प्रमुख बनाया है। साध संगत का निर्णय सही ही होगा। - अमर सिंह, भतीजे, डेरा प्रमुख संत वकील साहिब
डेरे प्रमुख को लेकर कोई पंचायत नहीं हुई है। डेरे में चलने वालीं गतिविधियों को लेकर पंचायत का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। डेरे की अपनी मैनेजमेंट है। वहीं डेरे को लेकर आगामी निर्णय लेंगे या संत वकील साहिब के परिवार के लोग कोई निर्णय लें। हम डेरे में हुई किसी पंचायत में नहीं गए और न ही आगे इस मामले में कोई पंचायत बुलाएंगे। - हरजेंद्र जीत कौर, सरंपच, जगमालवाली
मुझे कोई सूचना नहीं दी गई। डेरा प्रमुख का निर्णय करने का अधिकारी डेरे की संगत और ट्रस्टियों के पास है। डेरा अपने स्तर पर फैसला ले।
-लवप्रीत सिंह, सरपंच गांव माखा
कोट्स
मुझे मैसेज आया था। प्रशासन ने पूछा था कि शांति बनाए रखने को लेकर कोई सुझाव दे। जिससे सगत को परेशानी न हो। गद्दी को लेकर हमारा कोई संबंध नहीं है। डेरे की मैनेजमेंट और साध संगत अपने स्तर पर निर्णय ले। नये डेरा प्रमुख को लेकर हमें कोई जानकारी नहीं है। - कुलदीप सिंह, सरपंच , गांव पिपली ।