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बरबाद फसलों के मुआवजे का किसानों ने भरी हुंकार

Thu, 05 Nov 2015 11:46 PM IST
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
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सफेद मक्खी और चेपा से खराब हुई फसलों की उचित गिरदावरी करवा मुआवजे की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को सैकड़ों किसानों ने लघु सचिवालय के मुख्य द्वार के बाहर धरना देकर नारेबाजी की।
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इनेलो सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी, सिरसा के विधायक मक्खन लाल सिंगला, रानियां के विधायक रामचंद्र कंबोज और कालांवाली के बलकौर सिंह किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए धरने में शामिल हुए।

बाद में प्रदर्शनकारियों ने नगराधीश को ज्ञापन सौंपा। डबवाली मार्ग स्थित नई अनाज मंडी के मुख्य द्वार पर एकत्रित हुए जिले भर से आए किसानों ने पहले सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
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इस दौरान किसानों ने मंडी में आ रहे धान के दामों में बढ़ोतरी की मांग भी की। बाद में किसानों ने पैदल मार्च करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे।

पुलिस ने मुख्यद्वार पर पहले ही घेरा डाला हुआ था ऐसे में किसी को भी भीतर नहीं जाने दिया। ऐसे में किसान गेट के बाहर ही धरना देकर नोरबाजी शुरू कर दी।

जिला सतर्कता एवं निगरानी कमेटी की बैठक में भाग ले रहे सांसद और विधायकों को जब इस बारे में पता चला तो वे बैठक के बाद धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों का समर्थन करते हुए धरने पर बैठ गए।

इनेलो सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी, सिरसा से विधायक मक्खन लाल सिंगला, रानियां से विधायक रामचंद्र कंबोज ने कहा कि सरकार को किसान हित में जल्द फैसला लेना चाहिए।

उधर प्रदर्शनकारी किसानों दारा सिंह, परमजीत सिंह, गुररतन सिंह, सूरजभान, रामप्रताप, कर्मजीत सिंह, सुखदीप सिंह, मलकीत सिंह, सुखपाल सिंह, स्वर्णसिंह, श्रवण कुमार, अवतार सिंह,  अंग्रेज सिंह, जयभगवान सिंह, जगजीत सिंह, रुघबीर सिंह आदि ने कहा कि इस बार तो मौसम की मार ने उनके सारे सपने तोड़ दिए हैं।

पहले ओलावृष्टि से गेहूं की फसल बरबाद हुई बाद में सफेद मक्खी और चेपा से नरमा, कपास, ग्वार की फसल बर्बाद हुई। उन्होंने कहा कि सरकार और उनके प्रतिनिधि रोजाना एक ही बयान देने में लगे रहते है कि किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जब तक मुआवजा दिया जाएगा, तब तक किसान आत्महत्या जैसा कदम उठा चुका होगा। उन्होंने कहा कि पूरी तरह से बरबाद हो चुकी फसल को लेकर अभी तक सरकार ने किसानों को कोई राहत नहीं दी है।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि धान की नियमित खरीद शुरू की जाए, बासमती किस्मों का समर्थन मूल्य चार हजार रुपये प्रति क्विंटल किया जाए,

बरबाद फसलों का कम से कम 30 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाए, डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को तुरंत लागू किया जाए,

सभी किसानों के बैंक कर्जे माफ किए जाएं, बिजली बिल माफ किए जाएं, रबी फसलों के लिए बीज और खाद पर अनुदान दिया जाए, आवारा पशुओं से होने वाले नुकसान से किसानों का बचाव किया जाए

साथ ही इसका मुआवजा दिया जाए, रबी फसलों की सिंचाई के लिए पूरा नहरी पानी व लगातार ट्यूबवेलों पर 10 घंटे बिजली आपूर्ति दी जाए, मनरेगा को कृषि कार्यों से सीधे तौर पर जोड़ा जाए।

किसानों ने मांग की है कि जिन किसानों ने फसलें खराब होने के कारण आत्महत्या की है, उनके परिवारों को  सरकार उचित मुआवजा प्रदान करे। किसानों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि
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अगर 15 नवंबर तक मांगों को पूरा नहीं किया गया तो उन्हें मजबूरन भूख हड़ताल पर  बैठना पड़ेगा। इसके बाद उन्होंने नगराधीश बिजेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा।
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