रोड़ी। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत गांव रोड़ी में पात्र परिवारों को आवास देने के लिए किए गए सर्वे में गड़बड़ी सामने आई है। इसके बाद ग्राम सचिव को सस्पेंड कर दिया गया है और सरपंच को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इस गड़बड़ी के कारण 240 परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिला और उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया।
सर्वे में जो गड़बड़ी सामने आई है, उसमें 152 परिवारों को पक्का मकान दिखाकर अपात्र घोषित कर दिया गया, जबकि कई परिवारों के पास खुद का घर तक नहीं है। इसके अलावा, 63 परिवारों को गांव में अनुपस्थित बताया गया और 3 को मृत दिखाया गया। गांव के कई परिवारों का कहना है कि उन्होंने अपने प्लॉट बेचकर गांव छोड़ दिया क्योंकि उन्हें पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिला। सर्वे में गड़बड़ी का पता चलने के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस मामले की जांच की मांग की थी। जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर ग्राम सचिव आजाद हर्षवाल को निलंबित किया गया और सरपंच दर्शन सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
सरपंच को तीसरी बार नोटिस
जिला परिषद सीईओ सुभाषचंद्र ने बताया कि जिला उपायुक्त शांतनु शर्मा की ओर से सरपंच दर्शन सिंह को तीसरी बार कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इससे पहले भी दो बार सरपंच को नोटिस भेजा गया था। संवाद
अपात्र घोषित किए जाने के बाद कई परिवारों ने छोड़ा गांव
गांव रोड़ी में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कई परिवारों को अपात्र घोषित करने के बाद उनकी स्थिति और भी विकट हो गई। सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ा, जो पहले ही जर्जर मकानों में रहने को मजबूर थे। सत्य नारायण की पत्नी पुष्पा देवी का नाम योजना की सूची में था, लेकिन हालिया सर्वे में उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया। उनका पुराना मकान खंडहर की स्थिति में था, जिसमें रहना मुश्किल था। योजना का लाभ न मिलने और बदतर हालात के कारण उनके परिवार ने अपनी संपत्ति बेचकर गांव छोड़ दिया। ऐसे कई अन्य परिवार भी हैं जिनका नाम 2017-18 में सूची में था, लेकिन गलत सर्वे और देरी के कारण उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सका। सर्वे में गड़बड़ी के कारण कई परिवारों को आवास योजना का फायदा नहीं मिल पाया और उन्हें गांव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। इस स्थिति ने गांव में रहने वाले गरीब और जरूरतमंद परिवारों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
घर जर्जर हालत में, बारिश में घुसता है पानी
सुखविंदर कौर ने बताया कि उनके पास दो बच्चे हैं और उनका मकान अत्यंत जर्जर हालत में है। घर के दोनों कमरे आंगन से लगभग दो फीट नीचे बने हुए हैं, जिससे बरसात के मौसम में पानी अंदर घुस जाता है। मकान की छत भी खस्ता हालत में है, और हल्की बारिश में भी पानी टपकने लगता है। उनके पति दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, लेकिन सीमित आय के कारण घर की मरम्मत भी नहीं कर पा रहे हैं। घर में व्यवस्थित शौचालय तक नहीं है। छत की खराब स्थिति के कारण बरसात के दिनों में घर के भीतर बैठना भी जोखिमपूर्ण हो जाता है। ऐसे में बच्चे भी कमरे में बैठकर पढ़ाई करने से डरते हैं, जो सीधे तौर पर उनकी पढ़ाई पर असर डाल रहा है। इसके बावजूद, सर्वे में उन्हें अपात्र घोषित किया गया है।
पक्का मकान दिखाया, बीपीएल कार्ड कटा
गेबोरानी, जो रोड़ी निवासी हैं, ने बताया कि उनके पति की मौत हो चुकी है और दो बेटे दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। उनका मकान खस्ताहाल है, और बारिश के दौरान पानी अंदर भर जाता है। मकान की छत की स्थिति बेहद खराब है, और दीवारों में गहरी दरारें हैं। घर में शौचालय की उचित व्यवस्था भी नहीं है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता रहता है। आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर होने के बावजूद उनका बीपीएल कार्ड काट दिया गया है, जिससे दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो गया है। ऐसी कठिनाईयों के बावजूद सर्वे टीम ने उनके मकान को पक्का दिखा दिया और उन्हें अपात्र घोषित कर दिया।
टीम आई तो कमरे की आधी छत गिरी हुई थी
अमनदीप कौर ने बताया कि उनके पास तीन बेटियां और एक बेटा है। उनके पति गांव में फेरी लगाकर सब्जी बेचते हैं। जब सर्वे टीम उनके घर आई, तो मकान के नाम पर एक कमरा था, लेकिन उस कमरे की आधी छत गिरी हुई थी। बाद में शेष छत भी ढह गई, लेकिन सर्वे रिपोर्ट में मकान को पक्का दिखाकर उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया। मजबूरी में उन्होंने कर्जा लेकर एक कमरा बनवाया, लेकिन उसकी छत भी बरसात के दौरान पानी टपकने लगती है। ऐसी स्थिति में उन्हें रात को अपने पति और छोटे बेटे के साथ आंगन में अस्थायी शेड के नीचे रहना पड़ता है। तीनों बेटियां उसी टूटे-फूटे कमरे में समय बिताती हैं, जो उनकी मुश्किलों को और बढ़ा रहा है।