सिरसा में जमीन विवाद में पूर्व सरपंच के बेटे और भतीजे की तेजधार हथियारों से हत्या कर दी गई। ताऊ के पुत्रों और पौत्र ने वारदात को अंजाम दिया। आरोपियों पर हत्या के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
सिरसा के कालांवाली के गांव खोखर में रविवार सुबह करीब नौ बजे जमीन के विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। पूर्व सरपंच के बेटे झरमल सिंह (45) और उनके भतीजे दलजीत सिंह (25) की परिवार के ही सदस्यों ने तेजधार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी।
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वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गए। दोहरे हत्याकांड में पुलिस ने तीन नामजद सहित चार अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
मृतक झरमल सिंह के चचेरे भाई जसवीर सिंह ने बताया कि रविवार को झरमल सिंह के चाचा महेंद्र सिंह के मकान की नींव रखी जानी थी। सुबह करीब नाै बजे झरमल सिंह अपने भतीजे दलजीत सिंह के साथ बाइक से गुजर रहे थे।
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नोरंग रोड पर झरमल सिंह के ताऊ धर्मवीर सिंह के पुत्र मोती सिंह, बिकर सिंह और पौत्र जसवंत सिंह पुत्र बिकर सिंह ने उन्हें रोककर तेजधार हथियारों से जानलेवा हमला कर दिया। परिजन दोनों को कालांवाली सीएचसी ले गए जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
जसवीर सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले दोनों पक्षों में दो कनाल जमीन को लेकर विवाद हो गया था। इसी रंजिश में झरमल सिंह व दलजीत सिंह की हत्या की गई है। वहीं, घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी संदीप धनखड़ और कालांवाली थाना प्रभारी सुनील कुमार मौके पर पहुंचे।
डीएसपी संदीप धनखड़ ने बताया कि दलजीत सिंह के पिता जसवीर सिंह के बयान पर तीन नामजद बिकर सिंह, मोती सिंह, जसवंत सिंह, दो महिलाओं सहित चार अन्य के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है। जल्द ही हत्या में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
ग्रामीण बोले-सरपंच का चुनाव हारने से पैदा हुई रंजिश
गांव खोखर के ग्रामीणों ने बताया कि झरमल सिंह की मां जसमेल कौर व पिता मिठू सिंह दोनों गांव के सरपंच रह चुके हैं। एक चुनाव में झरमल सिंह के पिता मिठू सिंह और ताऊ धर्म सिंह ने आमने-सामने चुनाव लड़ा था। धर्म सिंह चुनाव हार गए थे। इस कारण दोनों परिवारों में रंजिश चली आ रही है।
हत्या की वारदात से खोखर में सहमे लोग, गांव में पसरा मातम
गांव खोखर में जमीन विवाद में रविवार को दोहरे हत्याकांड की सूचना मिलते ही लोग स्तब्ध रह गए। मृतकों के परिवार में मातम पसरा गया। माहौल तनावपूर्ण होने के कारण एहतियात के तौर पर गांव में पुलिसबल तैनात कर दिया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि झरमल सिंह और भतीजे दलजीत सिंह में काफी लगाव था। दोनों अक्सर साथ आते-जाते थे। दलजीत परिवार में इकलौता पुत्र था। इस घटना के बाद से पड़ोस के घरों में भी चूल्हा तक नहीं जला। दलजीत के पिता जसवीर ने बताया कि गांव में उनकी 15 एकड़ जमीन है।
सुबह करीब साढ़े सात बजे दलजीत और चचेरा भाई झरमल खेत गए थे। नौ बजे देर तक वापस नहीं लौटने पर भाई जगरूप के बेटे गुरप्रीत और भतीजे अर्शदीप पुत्र चमकौर को खेत भेजा। रास्ते में उन्होंने देखा कि मोती सिंह, बिकर सिंह और जसवंत सिंह सहित छह अन्य लोग दलजीत व झरमल पर तेजधार हथियारों से हमला कर रहे थे।
जसवीर ने बताया कि भतीजे उत्तम सिंह पुत्र गुरमीत सिंह से झरमल ने कुछ दिन पहले दो कनाल जमीन खरीदने का सौदा किया था। यह सौदा पहले मोती सिंह ने किया था लेकिन उत्तम ने सौदा रद्द करते हुए मोती को साई के छह हजार रुपये वापस कर दिए। इसी रंजिश के चलते मोती ने अपने भाई बीकर व भतीजे जसवंत के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया।