सिरसा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सिरसा आगमन पर हलोपा नेता और पूर्व विधायक गोपाल कांडा ने नगर परिषद और जन स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की जांच को लेकर कई पत्र मुख्यमंत्री को सौंपें। इस पत्रों ने नगर परिषद से लेकर शहर में हलचल मचा दी है। इस पत्र में भ्रष्टाचार की जांच करवाने की मांग की है। हैरानी की बात है कि एक साल से नगर परिषद पर काबिज भाजपा और हलोपा गठबंधन के चेयरमैन वीर शांति स्वरूप की कार्यप्रणाली पर ही उन्होंने सवालिया निशान लगा दिया है।
डिंग मैन पॉवर एजेंसी के सफाई कर्मचारियों को लेकर धांधली की विजिलेंस जांच को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, पूजा वेस्ट मैनेजमेंट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए 22 साल का टेंडर रद्द करने की बात कहीं है। हैरानी की बात है कि चेयरमैन की मॉनिटरिंग के बाद ही दोनों सफाई एजेंसियों के बिल अधिकारी पास करते हैं। इतना ही नहीं चेयरमैन के साइन के बिना कोई पैसा जारी नहीं होता है।
ऐसे में यदि एक साल किसी एजेंसी ने ई-रिक्शा नहीं लगाई, किसी ने कर्मचारी नहीं लगाए तो चेयरमैन कैसे उनके बिल पास कर रहे थे। हैरानी की बात है कि एक माह पहले तक विकास की बात करने वाले नेताओं को आखिरकार एक दम से भ्रष्टाचार कैसे नजर आने लगा है। इसको लेकर पूरे शहर में चर्चा बनी हुई है। वहीं, चेयरमैन भी हलोपा की ओर से जारी इन पत्रों को लेकर हैरान है।
चेयरमैन ने खोला मोर्चा
डिंग मैन पॉवर और पूजा वेस्ट मैनेजमेंट के अलावा इंजीनियरिंग विंग पर उठाए गए सवालों को लेकर चेयरमैन वीर शांति स्वरूप खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि डिंग मैनपॉवर को जोन बांटकर दिए गए हैं। जोन में सफाई के आधार पर पेमेंट जारी होती है। सफाई में यदि कमी पाई जाती है तो जुर्माना लगाया जाता है। डिंग मैन पॉवर को नियमित रूप से जुर्माना लगाया गया है। यदि पूर्व विधायक को संदेह है तो वे जांच करवा सकते है। इसी तरह से पूजा वेस्ट मैनेजमेंट की कार्यप्रणाली जांचने के बाद ही पेमेंट होती है। हर माह लाखों रुपये का जुर्माना पूजा वेस्ट मैनेजमेंट को लगता है। किसी प्रकार का कोई भ्रष्टाचार नहीं है। नियमानुसार सारे काम हो रहे हैं। जहां तक माइनस में टेंडर की बात है तो ठेकेदार माइनस में ले ले। इंजीनियर को आदेश है कि वे बेहतर काम करवाएंगे। दो बार नुकसान होगा तो ठेकेदार अपने आप काम छोड़ देगा।
पोर्टल के आधार पर होती है पेमेंट
पूजा वेस्ट मैनेजमेंट के अधिकारियों ने बताया कि डेढ़ साल से पोर्टल के माध्यम से पेमेंट होती है। कितने वाहन है और कितने कर्मचारी है। सब पोर्टल पर अपलोड होता है और निकास विभाग मॉनिटर करता है। कहीं कमी होने की सूरत में जुर्माना पोर्टल के माध्यम से लगाया जाता है। कितना कचरा सेग्रीगेट होता है और कितना उठान होता है। हर चीज को बारीकी से मॉनिटर किया जाता है। ई-रिक्शा को लेकर कहीं गई बात गलत है। ऐसा टेंडर में कुछ नहीं है। यदि एजेंसी सही तरह से काम नहीं कर रही होती तो पहले ही मुख्यालय स्तर पर पहले ही एक्शन हो जाता।
क्यों उठा विवाद, लोग बता रहे दबे जुबान
नगर परिषद, जन स्वास्थ्य विभाग को लेकर जांच करवाने और काम नहीं करने संबंधी विवाद के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। शहर से लेकर सरकारी विभागों में चर्चा है कि अब अधिकारियों ने हाजिरी लगाना बंद कर दिया है। अधिकारी बिना किसी दबाव के काम कर रहे हैं और निमयानुसार काम हो रहा है। सीधेतौर पर मुख्यालय व उच्चाधिकारियों की मॉनिटरिंग होने के बाद बिना अप्रुवल और अनुमति के सीधेतौर पर काम नहीं हो सकते हैं। पहले फोन आने के साथ ही नियमाें की परवाह किए काम हो जाते थे। अब यह सिस्टम बंद हो गया है। पूर्व पार्षद की माने तो पहले एक नेता के घर ही अधिकारी जाकर प्रोजेक्ट बनाते थे और वहीं पर टेंडर फाइनल होते थे। अब ऐसा नहीं होता हैं।
अगर पूर्व विधायक को संदेह है तो इस मामले मुख्यमंत्री जांच करवा सकते हैं। काम के अनुसार ही पेमेंट ठेकेदार की सफाई की जारी होती है। जो कमियां पाई जाती हैं तो उसके जुर्माने का प्रावधान है। समय पर समय लगाया जाता है। माइनस में ठेकेदार कोई भी टेंडर गुणवत्ता की जिम्मेदारी तकनीकी शाखा व पार्षद और लोगों की होती है। हमारी ओर से नियमित रूप काम की मॉनिटरिंग की जाती है। रिपोर्ट के आधार पर ही आगामी पैसा जारी होता है। अगर कमी पाई जाती है तो जुर्माना लगाया जाता है।
-वीर शांति स्वरूप, चेयरमैन