सिरसा। रबी सीजन 2026-27 में दलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा ने चना और मसूर के प्रमाणित बीज पर अनुदान देने की योजना शुरू की है। इसके तहत किसानों को किस्म की आयु के अनुसार 50 से 100 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। इसके अलावा जिले में 125 एकड़ क्षेत्र में प्रदर्शन प्लॉट लगाकर किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. विनोद फोगाट ने बताया कि पांच वर्ष से कम पुरानी किस्मों के चना बीज पर 75 प्रतिशत या अधिकतम 6,000 रुपये प्रति क्विंटल और मसूर बीज पर 100 प्रतिशत या अधिकतम 12,000 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान दिया जाएगा। पांच वर्ष से अधिक पुरानी किस्मों के चना बीज पर 50 प्रतिशत या अधिकतम 4,000 रुपये और मसूर बीज पर 75 प्रतिशत या अधिकतम 9,000 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान मिलेगा।
योजना का लाभ लेने के लिए किसान कृषि विभाग के पोर्टल agriharyana.gov.in पर 20 नवंबर तक पंजीकरण करवा सकते हैं। पंजीकरण 15 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। पात्रता और बीज की प्रामाणिकता का सत्यापन ओटीपी से होगा। निर्धारित अंशदान जमा करवाने के बाद किसान हरियाणा बीज विकास निगम और राष्ट्रीय बीज निगम के बिक्री केंद्रों से प्रमाणित बीज प्राप्त कर सकेंगे। एक किसान अधिकतम 2.5 एकड़ में बुवाई के लिए बीज ले सकता है। वितरण बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण या चेहरे की पहचान से होगा।
डॉ. फोगाट ने बताया कि मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज के तहत चने के 100 एकड़ में प्रदर्शन प्लॉट लगेंगे। इनमें सामान्य श्रेणी के लिए 80 और अनुसूचित जाति के किसानों के लिए 20 एकड़ निर्धारित हैं। मसूर के 25 एकड़ में प्रदर्शन होंगे। इनमें सामान्य श्रेणी के लिए 20 और अनुसूचित जाति के लिए पांच एकड़ शामिल हैं।
उन्नत किस्मों को मिलेगी प्राथमिकता
प्रदर्शन प्लॉट में अधिक उपज देने वाली, स्थानीय जलवायु के अनुकूल और कीटों व रोगों के प्रति प्रतिरोधी किस्मों को प्राथमिकता दी जाएगी। विभाग प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों से अवगत करवाएगा। डॉ. फोगाट ने किसानों से योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। अधिक जानकारी के लिए किसान संबंधित खंड कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।