फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पिता ने भरी हामी, बेटी बनी प्रदेश की बेस्ट गोलकीपर

Sat, 23 Jan 2016 01:41 AM IST
ब्ययूराो/अमर उजाला /सिरसा
विज्ञापन
विज्ञापन
बारह साल की उम्र में गोलकीपर बनाकर करनाल में हो रही राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अंडर-17 टीम के आगे खड़ा कर दिया। हवा में गोते खाकर विपक्षी टीम के गोल रोक लिए।
विज्ञापन


बेटी की इस प्रतिभा ने सामने कोई टिक न सका। आज वही बेटी हरियाणा की नंबर दो गोलकीपर है। हम बात कर रहे हैं 18 वर्षीय सुमन की।

खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल की बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाली इस बेटी के पिता मेक्खू लाल बिजली बोर्ड डबवाली में कार्यरत हैं। सुमन की तीन बहनें तथा एक भाई हैं। पिता ने बताया कि सुमन सातवीं कक्षा में पढ़ती थी। उस समय उसे फुटबाल खेलने का शौक था।  घर पर ऐसा माहौल नहीं था कि वह खुलकर अपनी इच्छा जता सकें।

परिजनों से छिप-छिपकर फुटबाल खेलने लगी। पीटीआई राजन ने गोल कीपर बनने की सलाह दी। खूब प्रैक्टिस की। उसी वर्ष राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए सुमन का चयन हो गया। इस बेटी के आगे सबसे बड़ा सवाल था कि क्या परिजन खेलने के लिए बाहर जाने की अनुमति देंगे। लेकिन जैसे ही सुमन ने अपने फुटबाल प्रेम को परिजनों के आगे रखा, तो सबसे पहले मेक्खू राम ने हामी भरी।
विज्ञापन


करनाल में आयोजित हुई प्रतियोगिता में अंडर-17 में खेलते हुए 12 वर्षीय सुमन ने दमदार गोल कीपिंग की। हवा में गोते खाकर गोल रोककर इस बेटी ने अपनी फिटनेस और प्रतिभा दिखाई। इसके बाद युमनानगर, अंबाला, भिवानी, कुरूक्षेत्र, सोनीपत, हिसार, सिरसा में शानदार प्रदर्शन किया। फुर्तीली खिलाड़ी ने एक वर्ष में तीन से चार स्टेट खेली। वर्ष 2016 सुमन के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है।

लगातार छह वर्षों से राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रही इस खिलाड़ी का चयन राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ। जबलपुर (मध्य प्रदेश) में हुई राष्ट्रीय महिला फुटबाल प्रतियोगिता में हरियाणा की टीम का हिस्सा बनी। प्रतियोगिता में हरियाणा तीसरे स्थान पर रहा।

यूं सुधारती है खेल
सुमन के प्रदर्शन पर कोच राजन खासा ध्यान रखते हैं। प्रतियोगिता के बाद गलतियां बताकर सुधार करवाते हैं। अपनी गलतियां सुधारने के लिए यह बेटी लड़कों तथा लड़कियों के फुटबाल मैच देखती है। यहीं नहीं टीवी पर अंतरराष्ट्रीय मैच देखकर अपना फुटवर्क सुधारने का भी प्रयास करती है। स्कूल समय में फुटबाल खेलने के बाद शाम को भी दो घंटे नेट पर खूब पसीना बहाती है। कोच के अनुसार सुमन खेल में ही नहीं बल्कि पढ़ाई में भी अव्वल रहती है।

प्रदेश की नंबर दो गोलकीपर
कोच राजन के अनुसार सुमन की गोल कीपिंग के चलते उनका विद्यालय जिला स्तर पर पिछले कई वर्षों से विजेता चला आ रहा है। सुमन एक वर्ष में तीन से चार स्टेट खेलती आ रही है। हरियाणा की टीम में स्थान पाने वाली वह जिला सिरसा की एकमात्र खिलाड़ी है। इस वर्ष वह प्रदेश की नंबर दो गोल कीपर बन गई है।

मेरे पिता मेक्खू लाल बिजली बोर्ड में  हैं। मां शकुंतला देवी घरेलू महिला हैं। मैं खिलाड़ी के तौर पर अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती हूं। ताकि लोग कहें कि वो देखो सुमन के माता-पिता जा रहे हैं।
-सुमन

मैंने, बेटी का शौक पूरा किया। जिसका परिणाम है कि बेटी आज शानदार खेल दिखा रही है। अगर बाधा बनता तो बेटी की नजरों में गिर जाता। मैं तो यही कहूंगा कि प्रत्येक मां-बाप को बेटियों के शौक पूरे करने चाहिए।
विज्ञापन

मेक्खू लाल (सुमन के पिता)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें