चोपटा में कृषि विभाग ने देसी कपास और ग्वार फसल प्रबंधन पर किसानों को दी जानकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
चोपटा। कृषि विभाग की टीम ने गांव राजपुरा साहनी में वीरवार को खेतों का निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों को फसल प्रबंधन और उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी दी। टीम ने देसी कपास और ग्वार की फसल की स्थिति का जायजा लिया।
टीम में एडीओ सलिंदर सहारण, महेंद्र बीटीएम, मदन सिंह एटीएम और आशीष पार्थन शामिल थे। अधिकारियों ने पौधों की बढ़वार और स्वास्थ्य की बारीकी से जांच की। उन्होंने किसानों से फसलों से जुड़ी समस्याओं की जानकारी ली। कृषि अधिकारियों ने समय पर उचित कृषि प्रबंधन अपनाने की सलाह दी।
फसलों की नियमित निगरानी से कीट और रोगों का शुरुआती अवस्था में पता चलता है। देसी कपास में बेहतर उत्पादन के लिए नियमित निगरानी जरूरी है। रस चूसक कीट, सफेद मक्खी, हरा तेला और गुलाबी सुंडी पर विशेष नजर रखने को कहा गया। अनावश्यक कीटनाशक छिड़काव के बजाय सही पहचान कर विशेषज्ञ की सलाह से दवा प्रयोग करें।
ग्वार में रोग प्रबंधन
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक बीडी यादव ने ग्वार के प्रमुख रोगों की रोकथाम बताई। उन्होंने जड़ गलन, तना गलन, झुलसा और पत्ती धब्बा जैसे रोगों का उल्लेख किया। खेत में जलभराव से बचाव और स्वस्थ एवं उपचारित बीज का प्रयोग महत्वपूर्ण है। संतुलित पोषण भी रोगों की रोकथाम में सहायक है। रोगग्रस्त पौधों को खेत से अलग करने और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी गई।
संतुलित पोषण और निगरानी का महत्व
यादव ने बिना पहचान के किसी भी दवा का छिड़काव न करने के लिए कहा। रोग की स्थिति के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की सलाह से ही उचित दवा का प्रयोग करें। अधिकारियों ने किसानों को संतुलित मात्रा में खाद और पानी उपयोग करने की सलाह दी। खेत में उचित नमी बनाए रखने और खरपतवार नियंत्रण पर भी ध्यान देने को कहा गया। नियमित निगरानी, संतुलित पोषण और समय पर कृषि प्रबंधन से उत्पादन बेहतर किया जा सकता है।