सिंचाई विभाग में पानी की पाइपों को लेकर प्रदर्शन करते हुए किसान।
सिरसा। ऐलनाबाद के किसानों ने सिंचाई विभाग में घग्गर में पानी की पाइप लगाने की अनुमति को लेकर सोमवार को प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि इस बारे में विभाग के अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया गया है। इसके बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत करने के लिए मंगलवार को बुलाया है। ऐसे में मंगलवार को किसानों के साथ बातचीत की जाएगी।
21 जुलाई का किसानों ने सिंचाई विभाग के कार्यालय में सांकेतिक धरना दिया था। इसके बाद अधिकारियों ने एक सप्ताह में समाधान की बात कहीं थी। इसके बाद भी अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की। इसी के चलते किसानों ने सोमवार को फिर से सिंचाई विभाग में 10 बजे से लेकर 4 बजे तक विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। 4 बजे के बाद सिंचाई विभाग के एसई व एक्सईन किसानों से बातचीत के लिए पहुंचे। ऐलनाबाद के करीब 15 गांवों के किसान इस समस्या से प्रभावित हैं।
किसान सरकारी शुल्क देने के लिए तैयार
पानी की पाइप लगाने को लेकर सिंचाई विभाग में प्रदर्शन कर रहे किसान नेता प्रकाश ममेरा, गुरदीप सिंह, गुरजीत मान व रणजीत गोदारा न बताया कि बीते घग्गर में सिंचाई के लिए पानी की पाइपों को डालने के लिए विभाग अनुमति नही दे रहा है जिससे किसानों को अपनी धान की फसल में सिंचाई करने में परेशानी होती है। किसानों का कहना है कि किसान अपनी अपनी पानी की पाइपों का सरकारी शुल्क भी देने को तैयार है उनसे शुल्क भी नहीं लिया जा रहा है। इससे किसानों को अपनी पानी की पाइपों को लेकर संशय बना हुआ है।
हर साल बाढ़ का पानी सिंचाई के लिए कराया जाता है उपलब्ध :
किसानों ने बताया कि एसजीसी नहर, एनजीसी नहर और शेरावाली समानांतर नहर से बाढ़ का पानी हर साल पाइपों से किसानों को धान के खेतों में सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाता है। इसकी राइस शूट पॉलिसी जून के पहले सप्ताह में आती थी। इसको लेकर इन पाइपों का शुल्क 20 जून तक जमा किया जाता था। किसी कारणवश पॉलिसी में देरी होती थी, तो पिछले वर्ष के अनुसार शुल्क जमा किया जाता था और घग्गर में बाढ़ का पानी आने पर पानी की पाइप चलाने की अनुमति दी जाती थी। नई नीति में कोई बदलाव होता था तो उसके अनुसार अतिरिक्त शुल्क या दस्तावेज लिए जाते थे। इस बार जुलाई खत्म होने को है न तो नई नीति आई है और न ही अभी तक किसानों से राइस शूट शुल्क जमा करवाया जा रहा है। इस बारे में अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया है।