पैंतालीसा व ऐलनाबाद क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने हिसार घग्गर ड्रेन के लिए ओटू हेड पर दिया धरना
मुख्यमंत्री का पुतला जलाकर लगाए मुर्दाबाद के नारे
फोटो 31,32
संवाद न्यूज एजेंसी
रानियां। चोपटा के पैंतालिसा व ऐलनाबाद क्षेत्र के किसानों ने सोमवार को अपनी मांगें पूरी न होने पर ओटू हेड पर स्टेट हाईवे-32 जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने साढ़े तीन घंटे तक प्रदर्शन किया। नाराजगी जताते हुए किसानों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का पुतला जलाया।
किसानों की प्रदर्शन की सूचना पहले से पुलिस को मिल गई थी। सूचना मिलने के साथ ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया और किसानों को मनाने का प्रयास किया। किसानों ने पुलिस की एक नहीं सुनी ओर ओटू हेड पर जाम लगा दिया। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने जाम खोलते हुए कहा कि उनकी मांगें शीघ्र नहीं मानी गईं तो दोबारा चक्का जाम किया जाएगा। किसानों का कहना है कि वे पिछले तीन वर्षों से हिसार घग्गर ड्रेन का पानी उठाकर घग्गर नदी में डालने की मांग कर रहे हैं। इस दिशा में कोई ठोस कदम प्रशासन ने नहीं उठाया है।
किसान छोड़ रहे गांव
धरने में किसान नेता प्रकाश सिंह ममेरां, जगदीश स्वामी, गुरी सैखों आदि किसानों ने कहा कि चोपटा क्षेत्र पिछले दो दशकों से सेम की समस्या से जूझ रहा है। हिसार घग्गर ड्रेन बार-बार टूटने से खेतों और गांवों में जलभराव हो जाता है। कई गांवों की फसलें नष्ट हो चुकी हैं। घरों में पानी घुसने से लोगों को गांव छोड़ने पड़ रहे हैं। वर्तमान में भी पैंतालीसा क्षेत्र के अनेक गांवों के खेतों में तीन से चार फीट तक पानी भरा हुआ है।
किसानों ने ये रखीं मांगें
किसानों ने मांग रखी कि ड्रेन का सेम का पानी दक्षिणी घग्घर कैनाल और ढाणी शेरां फलड़ी माइनर में डालने के बजाय सीधे घग्गर नदी में छोड़ा जाए। साथ ही ड्रेन की सफाई व खोदाई, तटबंधों को मजबूत करने, ओटू हेड पर लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम लगाया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि घग्गर के साइफन निर्माण पर चार करोड़ खर्च कर दिया गया है। यह गलत है। आज तक साइफन के टूटे गेट ठीक नहीं हुए हैं।
अब होगा आंदोलन
किसानों ने बताया कि कई सालों से किसान चोपटा क्षेत्र में परेशान हैं। वे सुबह गुडियाखेड़ा से आए तो उससे पहले ही पुलिस ओटू हैड पर तैनात थी। प्रशासन को सब जानकारी है। उसके बाद भी कोई समाधान नहीं हो रहा है। किसान कभी बाढ़, कभी सेम से मरा पड़ा है। हर कोई किसान को मार रहा है। अब इसको लेकर आंदोलन होगा और उसके लिए प्रशासन व सरकार जिम्मेदार होगी।
प्रशासन को पांच फरवरी को सौंपा था ज्ञापन
किसान नेताओं ने बताया कि इस मामले में उपायुक्त को 5 फरवरी को मुख्यमंत्री के नाम पर ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने 20 फरवरी तक समाधान करने का आश्वासन दिया था। आज तक कोई समाधान नहीं हुआ है। अब इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक स्थायी समाधान नहीं होगा, किसानों का आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन के दौरान धरने पर बैठे किसान। संवाद