सिरसा। एमएसपी पर सरसों बेचना किसानों के लिए गले की फांस बना हुआ है। टोकन कटने के बाद भी किसानों की सरसों का तोल करने से हैफेड ने इंकार कर दिया तो किसान रोष में आ गए। किसानों ने मंडी में स्थित सोसायटी की दुकान के समक्ष हंगामा कर दिया और 15 मिनट में तोल शुरू न होने पर दुकान को ताला लगाने और रोड जाम करने की चेतावनी दे दी। मामला उपायुक्त के संज्ञान में आया तो उन्होंने हैफेड उच्च अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। करीब डेढ़ बजे सरसों के तोल का काम शुरू हो पाया। जिसके पश्चात किसान शांत हो गए।
एक मई मंडी में सरसों लेकर पहुंचे 2598 किसानों की ओर से टोकन कटवाए गए थे। लेकिन हैफेड ने तोल करवाने से इंकार कर दिया। जिसके पश्चात कई किसान मंडी में सरसों का तोल करवाकर छोड़ गए तो कई किसान मौसम खराब होने के चलते वापस ट्रालियों को घर लेकर चले गए। बीते दिन शुक्रवार को सरकार ने एक मई को कटे हुए सभी टोकनों की सरसों का तोल किए जाने का पत्र जारी कर दिया। जिसके पश्चात आढ़तियों ने संबंधित किसानों को जानकारी देकर शनिवार को मंडी में बुला लिया। सुबह छह बजे ही किसान मंडी में सरसों से भरी ट्राली लेकर पहुंच गए। लेकिन यहां पर हैफेड अधिकारियों ने तोल करवाने से इंकार कर दिया। जिससे किसान रोष में आए गए। किसानों ने मामले की सूचना भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष लखविंद्र सिंह औलख को दी। किसान नेताओं ने मौके पर पहुंचकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और दोपहर 12 बजे तक खरीद शुरू होने का इंतजार करते है। लेकिन अधिकारियों की ओर से किसी भी तरह का आश्वासन नहीं दिया गया। जिसके चलते किसानों ने मंडी में स्थित 13 नंबर सोसायटी की दुकान का घेराव कर दिया। कार्यालय में तैनात कर्मचारियों ने मामले की सूचना 112 नंबर पर दी। सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया। वहीं किसानों ने रोष प्रदर्शन करते हुए कहा कि अगर एक बजे तक सरसों की खरीद व तोल का काम नहीं किया जाता तो वह सोसायटी के गेट को ताला लगाकर रोड जाम करने को मजबूर होंगे। ऐसे में सोसायटी मैनेजर ने प्रदीप खन्ना ने मामले की जानकारी हैफेड जीएम को दी और उन्होंने उपायुक्त पार्थ गुप्ता के संज्ञान में मामला लाया।
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डेढ़ बजे उपायुक्त ने फोन के माध्यम से खरीद शुरू करने के दिए निर्देश
वहीं उपायुक्त पार्थ गुप्ता के संज्ञान में मामला आने के बाद उन्होंने हैफेड के उच्च अधिकारियों से बातचीत की। जिसके पश्चात अधिकारियों ने विचार करने के बाद एक मई को टोकन कटने वाले किसानों की ही सरसों खरीद करने के निर्देश दिए है। बता दे कि बीते एक मई को जिले में 2598 किसानों की ओर से सरसों बेचने के लिए टोकन कटवाने गए थे। जिसका वजन करीब 50 हजार क्विंटल के लगभग था। लेकिन किसानों को मजबूरन सरसों वापस लेकर लौटना पड़ी थी।
अधिकारियों ने मंडियों में पड़ी सरसों की ही कर दी वेरिफिकेशन
सरसों की खरीद शुरू करने के आदेशों के बाद उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने अधिकारियों की एक कमेटी का गठन किया। अधिकारियों ने एक दिन में अलग-अलग मंडियों का निरीक्षण कर वहां पर भौतिक रूप से पड़ी सरसों की लिस्ट तैयार कर उपायुक्त को सौंप दी गई है। हालांकि अधिकारियों की ओर से तैयार की गई लिस्ट में उन्हें किसानों को शामिल किया गया था जिन किसानों की मंडी में सरसों पड़ी थी। जबकि घर पर सरसों वापस लेकर पहुंचे किसानों को लिस्ट से बाहर कर दिया गया। इससे किसानों में रोष बढ़ गया।
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किसान बोले: पांच दिन पहले कटा था टोकन, इतने दिन मंडी में किसके सहारे छोड़ते सरसों
वहीं किसान नेता लखविंद्र सिंह औलख, सुभाष कुमार, राम चंद, लाल सिंह, श्याम सुंदर ने कहा कि उन्होंने एक मई को टोकन कट गया था। खरीद न होने के कारण उन्होंने रोष प्रदर्शन करते हुए जाम भी लगाया था। लेकिन इसके बाद वह वापस घर पर लौट गए थे। अब अधिकारियों ने अपने स्तर पर ही वेरिफिकेशन कर लिस्ट तैयार कर दी। जबकि उसी दिन उनका टोकन काटा गया था। पांच दिन तक वह किसके सहारे मंडी में सरसों छोड़कर जाते । इस पर भी अधिकारियों ने ध्यान देना था। अब वह मंडी में सरसों लेकर पहुंचे है तो तोल करने से इंकार किया जा रहा है। अभी काफी किसानों की सरसों मंडियों में पड़ी है। वहीं किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब मुख्यमंत्री सिरसा आने वाले है। जिनके सामने वह सरसों की खरीद को लेकर सवाल उठाएंगे। वहीं कई किसानों ने कहा कि वह सरकार का विरोध करने को भी मजबूर होंगे ।
मंडियों में भौतिक रूप से पड़ी सरसों की वेरिफिकेशन की गई थी। मौके पर जो सरसों मंडी में पड़ी मिली है उसकी रिपोर्ट तैयार की गई थी। जिसमें केवल 1500 क्विंटल सरसों की मंडियों में पाई थी। लेकिन अब किसान मंडी में सरसों लेकर आए है। किसानों की सरसों की खरीद का काम शुरू कर दिया है।
-प्रदीप खन्ना, मैनेजर, दी सिरसा कोऑपरेटिव सोसायटी, सिरसा ।