सांसद के पीए को ज्ञापन सौंपते किसान।
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किसानों ने तीन कृषि कानून के विरोध में इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को सांसद सुनीता दुग्गल के निवास पर जाकर उनके पीए को ज्ञापन सौंपा। किसानों के आने की सूचना मिलने पर प्रशासन ने पुलिस तैनात कर दी। लेकिन किसान पुलिस को चकमा देकर दूसरे रास्ते से सांसद के घर के पास पहुंच गए। ऐसे में आनन फानन में पुलिस सांसद के घर के आगे पहुंची। सुनीता दुग्गल से इस्तीफा देकर किसानों का साथ देने की मांग की।
किसानों ने सांसद के पीए को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि किसानों ने सुनीता दुग्गल को वोट देकर सांसद बनाया। केंद्र सरकार किसानों पर अत्याचार कर रही और सांसद दुग्गल उनकी आवाज नहीं उठा रहीं। किसानों ने कहा सांसद सुनीता दुग्गल को शर्म आनी चाहिए। पिछले एक माह से लाखों किसान व उनके बच्चे काले कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में सड़कों पर बैठे हैं लेकिन केंद्र सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं ले रही। किसानों ने कहा कि सांसद इस्तीफा देकर किसानों के साथ आए। जब तक सरकार कानूनों को वापस नहीं लेती किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। किसान ज्ञापन सौंपकर वापस पक्का मोर्चे धरने पर पहुंचे। बता दें कि कृषि कानूनों का विरोध करते हुए किसान संगठन कई बार सांसद के निवास का घेराव कर चुके हैं। कुछ दिनों पहले किसानों ने भावदीन गांव के पास सांसद के काफिले का घेराव कर लिया था। किसानों ने तब भी इस्तीफा देने की मांग की थी।
दो दिनों में टोल कंपनियों को 22 लाख रुपये का नुकसान
किसानों द्वारा दो दिनों से टोल फ्री करने की घोषणा के चलते टोल कंपनियों को प्रतिदिन साढ़े 11 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। भावदीन टोल प्लाजा की प्रतिदिन की कमाई आठ लाख रुपये हैं। वहीं खुईयां मलकाना टोल प्लाजा की कमाई करीब साढ़े तीन लाख रुपये हैं। ऐसे में दो दिनों में टोल कंपनियों को करीब 22 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।