गोरीवाला। कालुआना डिस्ट्रीब्यूटर पर बने आउटलेट को एडजस्ट करने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भारी पुलिस बल तैनात कर कार्य करना पड़ा। किसानों ने भी विभाग की मंशा के तहत आउटलेट के साथ की जा रही अदला-बदली को लेकर आक्रोश जाहिर किया।
किसान राजाराम, संदीप, सुरेंद्र, राकेश, उग्रसेन, विजय मनोज, अमर कुमार ने बताया कि 2015 में एक्सईएन की ओर से 231 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की लिखित में फैसला किया गया था। 2017 में नहर की री-मॉडलिंग हुई थी। इसमें एल सेशन 2011-12 के नक्शे के तहत राजबाहे को बना दिया गया, जबकि फैसला 2015 में हुआ था। इस पर चार मोघो के किसानों ने स्टे ले लिया। 2017 में स्टे लेकर किसान हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने सिंचाई विभाग को अवहेलना की प्रताड़ना लगाई। फैसला 14 सितंबर को हो गया है। किसानों ने कहा कि उनकी माइनर पर पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। विभाग के एक्सईएन की ओर से हाईकोर्ट में एफिडेविट देकर यह सिद्ध किया है कि कालुआना डिस्ट्रीब्यूटर के किसानों को 231 क्यूसेक पानी छोड़ रहे हैं। किसानों को अंदेशा है कि बिना किसी सूचना के आउटलेट से की जा रही विभाग द्वारा छेड़छाड़ से पानी की कटौती होगी। किसानों ने कहा कि अगर विभाग इसी तरह से अपनी हठधर्मिता पर अडिग रहा तो किसान कोर्ट का सहारा लेंगे।
सिंचाई विभाग के एसडीओ मुकेश सुथार ने बताया कि कालुआना राजबाह पर बने आउटलेट 152000 व 156000 में क्षमता से अधिक पानी बह रहा है। राजबाहे पर आगे के किसानों को पर्याप्त मात्रा में सिंचाई पानी नहीं मिल पा रहा है। 149200 तक राजबाहा पक्का बना है। राजबाहे की रीमॉडलिंग की जानी थी। कोर्ट के फैसले के अनुसार विभाग की ओर से 2016 में कार्य रोक दिया गया था। कोर्ट ने प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए आदेश जारी कर दिए हैं। जब तक माइनर का रीमॉडलिंग का कार्य होगा, आउटलेट के किसानों को 14.11 क्यूसेक पानी अतिरिक्त आर्डर किया हुआ दिया जाएगा।