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पीड़ित परिवारों ने कार्यालय के बाहर गाड़े तंबू

Thu, 03 Dec 2015 12:18 AM IST
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
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महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत सौ-सौ गज का प्लॉट लेने के लिए गांव डबवाली के 131 परिवार पिछले करीब सात वर्षों से बीडीपीओ कार्यालय नाप रहे हैं।
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तीन दफा धरना-प्रदर्शन कर चुके पीड़ित परिवारों ने बुधवार को चौथी दफा बीडीपीओ कार्यालय में अपने तंबू गाड़ दिए। बीडीपीओ ने दो टूक लफ्जों में कह दिया कि कब्जा छुड़वाना उनके बस की बात नहीं।

जब तक पंचायत नहीं बनेंगी, तब तक कब्जा नहीं मिल सकता। जिसके बाद आक्रोशित लोगों ने अपने धरने को अनिश्चितकाल के लिए कर दिया है।

सुबह करीब 10 बजे पीड़ित परिवार अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के नेतृत्व में बीडीपीओ कार्यालय में इकट्ठे हुए।

यूनियन के जिला प्रधान भाला राम भारूखेड़ा, संत राम, मनदीप सिंह, स्वर्ण सिंह, आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन के प्रदेश उपप्रधान वीरों रानी ने बताया कि वर्ष 2007-08 में सरकार ने गांव डबवाली के 431 परिवारों को सौ-सौ गज के प्लॉट के लिए पात्र माना था।
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प्लॉटों का इंतकाल तथा रजिस्टरी करवाने के बाद कब्जा नहीं दिलाया था। पहली दफा 30 जून 2015 को एसडीएम ऑफिस के आगे प्रदर्शन किया।

जिसके बाद आनन-फानन में एक बीजेपी नेता को बुलाकर 300 परिवारों को कब्जा दिलाया गया। इसके बाद कोई सुध नहीं ली। 14 अगस्त 2015 तथा 3 नवंबर 2015 को दोबारा प्रदर्शन किया।

लेकिन कब्जा नहीं दिलाया गया। आज भी उनकी जमीनों पर दबंगों का कब्जा है। बुधवार को चौथी दफा साफ तौर पर कह दिया कि जब तक पंचायत नहीं बनती, तब तक प्लॉट पर कब्जा नहीं दिलाया जा सकता।

जिसके बाद धरने पर बैठे लोग भड़क गए। हरियाणा सरकार तथा बीडीपीओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

1667 लोगों को नहीं मिले प्लॉट
वर्ष 2007-08 में हुए सर्वे के दौरान खंड डबवाली की 48 ग्राम पंचायतों में 50 गांवों के 7411 परिवारों को गरीबी रेखा से नीचे मानकर सौ-सौ गज के प्लॉट के लिए पात्र माना गया था। अब तक 5744 परिवारों को प्लॉट पर कब्जा मिला है। 1667 परिवार ऐसे हैं, जो प्लॉट के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं।

जब तक पंचायत नहीं बन जाती, तब तक 131 परिवारों के प्लाट संबंधी फैसला नहीं हो सकता। हम इमरजेंसी परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। गरीबों की भूमि पर पक्के तौर पर कब्जा करने वाले लोगों के खिलाफ ग्राम शामलात भूमि अधिनियम-7 के तहत केस उपमंडलाधीश की अदालत में दायर किया जाएगा।
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-सतिंद्र सिवाच, बीडीपीओ, डबवाली
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